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Showing posts from June, 2026
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​  कटनी आरटीओ: जय और वीरू के ‘प्राइवेट कंधों’ पर सरकारी तंत्र, साहब बने दर्शक! ​ विशेष  रिपोर्ट: सरकारी दफ्तर में 'प्राइवेट सरकार' का खेल ​ कटनी। देश में सरकारी विभागों के डिजिटलाइजेशन और पारदर्शिता के दावों के बीच, कटनी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कटनी आरटीओ का पूरा दारोमदार किसी सरकारी अधिकारी या बाबू के हाथ में नहीं, बल्कि 'जय और वीरू' की तर्ज पर काम कर रहे दो रसूखदार प्राइवेट व्यक्तियों के कंधों पर टिका हुआ है। ​कहने को तो विभाग के मुखिया आरटीओ संतोष पाल हैं, लेकिन चर्चा है कि दफ्तर की असली कमान और 'रिमोट कंट्रोल' इन्हीं दो बाहरी कारिंदों के पास है। ​ सवालों के घेरे में आरटीओ संतोष पाल की भूमिका ​ इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल कटनी आरटीओ संतोष पाल की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। आखिर एक जिम्मेदार शासकीय पद पर बैठे अधिकारी की नाक के नीचे यह सब कैसे चल रहा है? ​ बड़ा सवाल: एक प्रतिबंधित और संवेदनशील शासकीय विभाग में, जहाँ आम जनता क...
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​ रीठी के कुम्हरवारा में माफिया राज हावी: अवैध रेत खनन का खेल जारी, जनसुनवाई से CM हेल्पलाइन तक की शिकायतें बेअसर ​ कटनी में दिनदहाड़े रेत का कथित अवैध उत्खनन; शासन को लाखों के राजस्व नुकसान का आरोप, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल। ​ कटनी मध्यप्रदेश के कटनी जिले के रीठी जनपद से कथित अवैध रेत खनन का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत कुम्हरवारा में बेखौफ चल रहे इस खेल को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। शिकायतकर्ता ईश्वरी चक्रवर्ती का आरोप है कि उन्होंने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई से लेकर, खनिज विभाग, वन विभाग, थाना कुठला और यहाँ तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कथित खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अवैध उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ​ नियमों को ताक पर रखकर पोकलेन और जेसीबी से खुदाई ​शिकायतकर्ता के अनुसार, रीठी तहसील के ग्राम कुम्हरवारा स्थित खसरा नंबर 373 एवं 374 की भूमि पर बिना किसी वैध खनन अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना पर्यावरणीय सके लंबे समय से जेसीबी और प...
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​ बड़वारा-विजयराघवगढ़ में रेत पर ‘आधी’ कार्रवाई: ट्रैक्टरों पर गिरेगा गाज, तो हाइवा को किसका ‘राज’? ​ विशेष रिपोर्ट: पुलिस की मुस्तैदी पर उठते सवाल; क्या सिर्फ छोटे मोहरों पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ रहा प्रशासन? ​कटनी। जिले के बड़वारा और विजयराघवगढ़ इलाके में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ पुलिस और खनिज विभाग की ‘ताबड़तोड़’ कार्रवाई चर्चा में है। रोजाना सुबह-शाम ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़े जाने की खबरें सरकारी प्रेस नोट की शोभा बढ़ा रही हैं। पुलिस मुस्तैद दिख रही है, अधिकारी पीठ थपथपा रहे हैं। लेकिन इस कथित ‘सख्त’ कार्रवाई के पीछे का एक स्याह पहलू अब जनता के बीच कौतूहल और आक्रोश का विषय बन चुका है। ​सवाल सीधा है—क्या बड़वारा और विजयराघवगढ़ की नदियों का सीना सिर्फ ट्रैक्टर ही छलनी कर रहे हैं? क्या इन रास्तों से रेत से ओवरलोड होकर गुजरने वाले 'हाइवा' (भारी डंपर) गायब हो चुके हैं, या फिर उन्हें किसी ‘बड़े हाथ’ का अभयदान प्राप्त है? ​ तस्वीर का एक पहलू: सिर्फ ट्रैक्टर-ट्रॉली ही क्यों बनते हैं निशाना? ​पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बड़वारा और विजयराघवगढ़ में जब्त किए ग...
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कटनी- दिनांक  27/06/26 की प्रमुख खबरे   ​1. विजयराघवगढ़ वन क्षेत्र में बड़ी क्रूरता: तालाब में जहर देकर 14 वन्यजीवों का शिकार ​कटनी जिले के विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत घुघरी कांटी गांव के पास एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकारियों ने जंगल के एक तालाब में जहर मिला दिया, जिससे पानी पीने के कारण 12 चीतल और 2 सांभर की दर्दनाक मौत हो गई। ​ कार्रवाई: वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए डॉग स्क्वॉड की मदद से बिनाउली गांव से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से शिकार में इस्तेमाल उपकरण और मांस बरामद हुआ है। ​2. स्लीमनाबाद में देश की सबसे बड़ी सिंचाई टनल तैयार ​विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे बड़ी भूमिगत सिंचाई टनल (सुरंग) बनकर तैयार हो गई है। इस टनल के माध्यम से नर्मदा का जल विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा, जिससे जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था और कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। ​3. बहोरीबंद ITI में प्रवेश के लिए अंतिम अवसर ​शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (ITI) बहोरीब...
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​सूत्रो के हवाले से ​ कटनी आरटीओ में 'अघोषित किंगमेकर': दो प्राइवेट गुर्गे चला रहे हैं परिवहन विभाग, आरटीओ पर लग रहे गंभीर आरोप दो मे से एक पर पहले भी लग चुके है लेनदेन के गंभीर आरोप  ​ कटनी। सरकारी विभागों में बिचौलियों और 'प्राइवेट कारिंदों' का दखल कोई नई बात नहीं है, लेकिन कटनी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जो खबरें छनकर सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। 'विश्वस्त सूत्रों' के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, कटनी तत्कालीन  RTO के समानांतर दो ऐसे रसूखदार 'प्राइवेट' व्यक्ति सक्रिय हैं, जिन्होंने पूरे आरटीओ दफ्तर को अपने कब्जे में ले रखा है। ​हैरानी की बात यह है कि ये दोनों व्यक्ति न तो परिवहन विभाग के कर्मचारी हैं और न ही इनके पास कोई कानूनी अधिकार है। इसके बावजूद, कटनी आरटीओ का पूरा दारोमदार इन्हीं दो चेहरों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। ​ वाहन चेकिंग से लेकर 'वसूली' तक... बिना इनकी मर्जी पत्ता भी नहीं हिलता ​सूत्रों का दावा है कि इन दोनों प्राइवेट व्यक्तियों की हैसियत आरटीओ संतोष पाल के बेहद करीबी और 'खास सिपहसालार...
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26 जून 2026 को कटनी जिले और उसके आस-पास के क्षेत्रों से कई प्रमुख खबरें: ​1. विजयराघवगढ़: तालाब में जहर मिलाकर 14 वन्यजीवों का शिकार, 3 गिरफ्तार ​विजयराघवगढ़ वन परिक्षेत्र (घुघरी बीट) के जंगल में शिकारियों की बड़ी क्रूरता सामने आई है। शिकारियों ने तालाब के पानी में जहर मिला दिया, जिसे पीने से 12 चीतल और 2 सांभर की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। ​ कैसे हुआ खुलासा: गुरुवार को गश्त के दौरान वन विभाग को शव मिले। इसके बाद डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई, जो सीधे घुघरी गांव के एक संदिग्ध के घर जा पहुंची। ​ कार्रवाई: तलाशी में वन्यजीवों के बाल, मांस और फंदे बरामद हुए। वन विभाग ने मुख्य आरोपी सुरेश चौधरी और दुर्गेश सहित कुल 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ​2. कटनी ग्रामीण (निवार/लखापतेरी): हाईवे चाकूबाजी कांड के आरोपी जेल भेजे गए ​लखापतेरी हाईवे पर हुई चाकूबाजी की घटना में निवार पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है , जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश अब भी जारी है। ​3. रीठी: अकीदत के साथ मनाया गया मातमी पर्व मुहर्रम ​कटनी ग्रामीण के रीठी क्षेत्र मे...
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  ​ हाईकोर्ट की राहत का दावा भी बेअसर, आदिवासी परिवार का आशियाना जमींदोज! ​62 वर्षीय बुजुर्ग की कलेक्टर परिसर में सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी; प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप ​ विशेष रिपोर्ट | कटनी  ​मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक बार फिर 'बुलडोजर संस्कृति' पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कौड़िया में एक 62 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग के मकान को प्रशासनिक अमले द्वारा ढहाए जाने का सनसनीखेज मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके पास माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का स्टे ऑर्डर (राहत) था, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की गई। न्याय न मिलने पर पीड़ित ने सात दिनों के भीतर पूरे परिवार सहित कलेक्टर परिसर में आत्महत्या करने की लिखित चेतावनी दी है। ​"हाथ जोड़ती रही पत्नी, जबरन बाहर निकाल कर चलाया बुलडोजर" ​पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और झकझोर देने वाले हैं। घटना के समय घर के मुखिया मौजूद नहीं थे। पीड़ित की पत्नी का आरोप है कि: ​"मैंने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हाथ जोड़े, प...
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  कटनी जिले की 25 जून 2026 की महत्वपूर्ण खबरे ​1. अवैध अहाते पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई ​कटनी के स्टेशन रोड स्थित 'ईश्वर कृपा कॉम्प्लेक्स' में बिना अनुमति के चल रहे एक अवैध/अघोषित अहाते पर पुलिस ने रात में छापा मारा। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के नेतृत्व में हुई इस औचक कार्रवाई से मौके पर हड़कंप मच गया। पुलिस ने वहां अवैध रूप से शराब पिलाने की व्यवस्था का भंडाफोड़ किया, कई लोगों को रंगे हाथों पकड़ा और शराब व अन्य सामग्री जब्त कर आगे की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ​2. पुलिसकर्मी पर हमला करने वाले आरोपियों का निकाला जुलूस ​कटनी पुलिस ने एक मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिसकर्मी पर चाकू से हमला करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सड़क पर आरोपियों का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला, जहाँ आरोपियों ने अपनी करतूत के लिए जनता के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी। ​3. क्राइम और लूटपाट की वारदातें ​ ऑटो चालक से लूट: कटनी नगर क्षेत्र में एक युवती और दो युवकों द्वारा एक ऑटो चालक को चाकू दिखाकर डराने और ₹3,000 लूटने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने ऑटो में तोड़फोड़ भी...
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  ​ कटनी में पुलिसिया बर्बरता: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर टीआई ने निकाली खुन्नस, लॉकअप में युवक को पीटा, अमानवीय कृत्य का आरोप ​ खास बातें: ​ माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे पर अवैध हिरासत और 'थर्ड डिग्री' देने के गंभीर आरोप। ​ पीड़ित चाय विक्रेता का आरोप— लॉकअप में बेरहमी से पीटा, ऊपर पेशाब किया और एनकाउंटर की धमकी दी। ​ एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने दिए जांच के आदेश; मानवाधिकार आयोग और डीजीपी तक पहुंची शिकायत। ​ कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली पुलिसिया बर्बरता और तानाशाही का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ माधवनगर थाना प्रभारी (टीआई) संजय दुबे पर एक चाय विक्रेता को गैर-कानूनी ढंग से लॉकअप में बंद रखने, बेरहमी से पीटने और लॉकअप के भीतर ही अत्यंत अमानवीय व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रताड़ित युवक ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुँचकर एसपी अभिनय विश्वकर्मा को लिखित शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। ​ सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत बनी आफत ​शि...
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​ जनसुनवाई: उम्मीदों का मेला या सिर्फ कागज़ी दिलासा? ​  आवेदनों की संख्या का ढिंढोरा, लेकिन निराकरण के आंकड़ों पर रहस्यमयी चुप्पी ​ मुख्य बिंदु: ​दूर-दराज से भाड़े के पैसे जुटाकर आते हैं फरियादी। ​अगले दिन अखबारों में छपती है सिर्फ आवेदनों की संख्या। ​नियमों के मुताबिक ७ दिनों में निराकरण और उसका प्रकाशन बेहद ज़रूरी। ​ कटनी  शासन और प्रशासन की मंशा बहुत साफ थी—एक ऐसा मंच, जहां जनता और अधिकारी आमने-सामने हों और समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट या तय समय सीमा में निपटारा हो सके। इसी मंशा के साथ शुरू हुई थी 'जनसुनवाई'। लेकिन आज हालात देखकर ऐसा लगता है कि जनसुनवाई महज़ एक प्रशासनिक औपचारिकता और दिलासा देने का केंद्र बनकर रह गई है। ​ आंकड़ों की बाज़ीगरी, हकीकत में नतीजा सिफ़र ​हर मंगलवार या जनसुनवाई के दिन मीडिया में बड़े-बड़े आंकड़ों के साथ खबरें प्रकाशित होती हैं कि "आज जनसुनवाई में आए इतने सौ आवेदन" , या "कलेक्टर ने सुनीं इतनी समस्याएं" । लेकिन इन आवेदनों का अगले सात दिनों में क्या हुआ? कितने पीड़ितों को न्याय मिला और कितने आवेदनों का 'संतुष्टिपूर्ण'...
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  ​ विशेष रिपोर्ट: ‘तेल बचाने’ के नारों के बीच सरकारी पहियों में फुंकते लाखों, कटनी से देश तक सुलगते सवाल! ​ कटनी । एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार लगातार देशवासियों से ईंधन बचाने, पर्यावरण को सुरक्षित रखने और ग्रीन एनर्जी अपनाने की अपील कर रही है; विज्ञापन और अभियानों के जरिए जनता को बूंद-बूंद तेल की कीमत समझाई जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ, जमीनी हकीकत इन दावों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है। सूत्रों से मिली एक चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, कटनी नगर निगम के वाहनों ने महज एक महीने के भीतर लगभग 17 से  ₹18 लाख का ईंधन (डीजल-पेट्रोल) फूंक दिया है। ​यह आंकड़ा न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी बड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। ​ एक शहर की यह तस्वीर, तो पूरे देश का क्या होगा हाल? ​कटनी जैसे एक सीमित दायरे और आबादी वाले जिले में अगर नगर निगम की गाड़ियों का मासिक ईंधन खर्च ₹18 लाख के आसपास पहुंच रहा है, तो जरा कल्पना कीजिए कि देश के महानगरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) और हजारों अन्य नगर निगमों व नगर पालिकाओं में रोजाना 'शहरी व्यवस्था' के नाम पर कितने करोड़ ...
​ कटनी: 'सुस्ती और चुस्ती' के फेर में फंसी ग्राम पंचायतें, PHE विभाग का एक ही राग— "समय नहीं है!" ​ विशेष रिपोर्ट कटनी। सरकारें बदलती हैं, योजनाएं बदलती हैं, और दावों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स भी बदलते हैं। लेकिन अगर कुछ नहीं बदलता, तो वह है कटनी के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का ढर्रा। ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल और पेयजल योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी जिस विभाग पर है, वह इन दिनों खुद 'समय की कमी' के संकट से जूझ रहा है। आलम यह है कि विभाग की कभी भारी सुस्ती तो कभी अचानक जागी चुस्ती के बीच जिले की कई ग्राम पंचायतों के विकास कार्य अधर में लटके हैं। ​जब इस सुस्ती और लेत-लतीफी को लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की जाती है, तो उनका बेहद घिसा-पीटा और गैर-जिम्मेदाराना जवाब सामने आता है— "वर्तमान में अभी हमारे पास थोड़ा समय की कमी है।" ​ बड़ा सवाल: जनता के टैक्स से सैलरी, फिर समय की कमी कैसे? ​अब सबसे बड़ा और बुनियादी सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी तंत्र में 'समय की कमी' जैसा कोई कानूनी बहाना हो सकता है? अधिकारी और क...
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   हादसों का 'ब्लैक स्पॉट' बना लमतरा ओवरब्रिज ​ 14 जून के दर्दनाक हादसे से भी प्रशासन ने नहीं लिया सबक; क्या किसी और बड़ी तबाही का इंतजार कर रहा है जिला प्रशासन? ​ कटनी  बीती 14 जून को लमतरा ओवरब्रिज के पास बने उस अंधे मोड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। चीख-पुकार, खून से सनी सड़कें और एंबुलेंस के सायरन की आवाज ने पूरे इलाके को दहला दिया था। लेकिन इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है और ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। ​## अंधा मोड़... साक्षात यमराज का घर! ​स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि लमतरा ओवरब्रिज के पास का यह अंधा मोड़ किसी सुसाइड पॉइंट से कम नहीं है। ​ नो साइन बोर्ड: मोड़ से पहले न तो कोई स्पीड ब्रेकर है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। ​ अंधेरे का साम्राज्य: रात के समय यहाँ स्ट्रीट लाइट्स की मुकम्मल व्यवस्था न होने से खतरा दोगुना हो जाता है। ​ रफ्तार पर नहीं कोई लगाम: भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार इस अंधे मोड़ पर...
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​ कटनी जिला प्रशासन 'सुप्त अवस्था' में, हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाकर कैलवारा खुर्द में फिर तनीं अवैध दुकानें ​ रसूख और दबंगई के आगे नतमस्तक हुआ कानून: याचिका क्रमांक WP-26314-2021 में पूर्व में जमींदोज हो चुकी दुकानों का उपसरपंच भूषण पाठक ने दोबारा करा दिया निर्माण, जिम्मेदार मौन। ​  कटनी ​न्यायालय के आदेश का सम्मान और उसका अक्षरशः पालन कराना जिस जिला प्रशासन की पहली और संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, जब वही प्रशासन 'कुंभकर्णी नींद' सो जाए, तो दबंगों के हौसले आसमान छूने लगते हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज और कानून व्यवस्था को सरेआम ठेंगा दिखाने वाला मामला कटनी जिले के ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द से सामने आया है। यहाँ माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर) के जिस कड़े आदेश के तहत पूर्व में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर अवैध दुकानों को हटाया गया था, आज उसी जगह पर दबंगई के दम पर पुनः पांच अवैध दुकानें सीना ताने खड़ी हैं। ​माननीय उच्च न्यायालय (म.प्र.) का वह आदेश जिसे ठेंगा दिखाया गया: ​ याचिका क्रमांक (WP No.): WP No. 26314 of 2021 (सुरेंद्र मोहन मिश्रा एवं अन्य बनाम म...
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  ​ ग्राम बिचुआ न्यूज : ताले में कैद रहा 'शिक्षा का मंदिर', शाला प्रभारी पर घूमने और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप 18/06/26 ​ बिचुआ। सरकार भले ही 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' का नारा देकर शिक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। ग्राम बिचुआ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो शिक्षा विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। यहाँ के शासकीय विद्यालय में कल सुबह से लेकर शाम तक ताला लटका रहा। नौनिहाल स्कूल के बाहर इंतजार कर लौट गए, लेकिन न तो स्कूल का ताला खुला और न ही कोई जिम्मेदार शिक्षक वहाँ पहुँचा। ​ आए दिन की कहानी, ग्रामीण परेशान ​ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। ग्राम बिचुआ के निवासियों का कहना है कि यह कोई एक दिन की बात नहीं है, बल्कि यहाँ 'आए दिन की यही कहानी' बन चुकी है। बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। ​ शाला प्रभारी पर लगे गंभीर आरोप: "पढ़ाने नहीं, घूमने आते हैं" ​ग्रामीणों ने सीधे तौर पर शाला प्रभारी सुरजीत तिवारी पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा...
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​ प्रशासनिक नाक के नीचे 'उर्वशी होटल' की मनमानी, विश्राम बाबा मंदिर गली के बगल मे पसरी गंदगी से गंभीर बीमारियां का खतरा  ​ एक तरफ कलेक्टर ऑफिस, दूसरी तरफ आस्था का केंद्र; बीच में होटल के कचरे की सड़न से राहगीर बेहाल, नगर निगम मौन ​ कटनी। शहर का सबसे वीआईपी और आस्था से जुड़ा क्षेत्र इन दिनों एक निजी होटल की घोर लापरवाही और नगर निगम की उदासीनता का शिकार बना हुआ है। कचहरी मार्ग स्थित कलेक्टर कार्यालय के पीछे और उद्योग विभाग के ठीक बगल में पूरे कटनी जिले की अगाध आस्था का केंद्र विश्राम बाबा काली मंदिर स्थित है। लेकिन इस पवित्र स्थल के मार्ग के ठीक बगल मै स्थित होटल उर्वशी ने पूरे क्षेत्र को नरक बना कर रख दिया है। होटल से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को खुले में फेंकने से  गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ​रोड मे  खड़े होना भी मुश्किल, सड़न से राहगीर परेशान ​स्थानीय नागरिकों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि होटल उर्वशी से निकलने वाले जूठन और कचरे की सड़न इतनी ज्यादा है कि वहां एक मिनट भी खड़े होना दूभर हो चुका है। तेज बदबू के कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ना...
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​ विशेष रिपोर्ट: सरकारी काम, सरकारी पैसा... फिर पंचायतों पर जीएसटी का 'टैक्स टेरर' क्यों? ​ कटनी ​ मुख्य बिंदु: ​ विडंबना: जब काम शासन का है और फंड भी शासन का, तो टैक्स किस बात का? ​ असर: टैक्स के बोझ और कागजी कार्रवाई से गांवों का विकास ठप। ​ सटीक सवाल: क्या स्वायत्त संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने का यही तरीका है? ​ सरकारी जेब से निकला पैसा, घूमकर फिर सरकारी खजाने में! ​लोकतंत्र की सबसे छोटी और सबसे महत्वपूर्ण इकाई 'ग्राम पंचायतें' आज एक अजीबोगरीब वित्तीय चक्रव्यूह में फंसी हुई हैं। ग्रामीण भारत के विकास का दावा करने वाली सरकारें एक हाथ से पंचायतों को विकास निधि (Funds) देती हैं, और दूसरे हाथ से 'जीएसटी' (GST) और 'एसजीएसटी' (SGST) के रूप में उस राशि का एक बड़ा हिस्सा वापस खींच लेती हैं। ​यह किसी विडंबना से कम नहीं है कि जब संस्था शासन की है, नीति शासन की है, काम शासन का हो रहा है और उसमें लगने वाला पैसा भी शासन की ही संचित निधि से आ रहा है, तो फिर इस प्रक्रिया पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाना कहां तक न्यायसंगत है? ​ कागजों में उलझा 'प्र...