विशेष रिपोर्ट: कागजों पर साफ, हकीकत में 'हरी-भरी' कटनी नदी लाखों स्वाहा, फिर भी जलकुंभी का 'साम्राज्य'; क्या सिर्फ बजट ठिकाने लगाने का जरिया बन गई है जीवनदायिनी? कटनी। कहने को तो कटनी नदी इस शहर की जीवनदायिनी है, लेकिन आज इसकी बदहाली पर आंसू बहाने वाला कोई नहीं है। कटनी नगर निगम हर साल नदी की सफाई के नाम पर लाखों रुपयों का बजट 'पानी' की तरह बहा देता है। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, पोकलेन मशीनें उतरती हैं, और फोटो सेशन भी होते हैं। लेकिन नतीजा? ढाक के तीन पात! आज भी कटनी नदी पानी से नहीं, बल्कि हरी-भरी जलकुंभी के भारी अंबार से पटी पड़ी है। जनता का सवाल सीधा है— क्या सफाई सिर्फ सरकारी फाइलों और बयानों तक ही सीमित है? क्या इस जलकुंभी का कोई स्थाई इलाज नहीं है? तस्वीर झूठ नहीं बोलती: नदी या घास का मैदान? यदि आप आज कटनी नदी के पुल से नीचे झांकेंगे, तो आपको यह पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि यह कोई बहती हुई नदी है या खेल का मैदान। जलकुंभी की मोटी परत ने नदी का दम घोंट रखा है। सूरज की किरणें तरसीं: जलकुंभी के कारण पानी के भीतर ऑक्सीजन का स्तर लगातार ...