रीठी के कुम्हरवारा में माफिया राज हावी: अवैध रेत खनन का खेल जारी, जनसुनवाई से CM हेल्पलाइन तक की शिकायतें बेअसर

कटनी में दिनदहाड़े रेत का कथित अवैध उत्खनन; शासन को लाखों के राजस्व नुकसान का आरोप, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल।

कटनी

मध्यप्रदेश के कटनी जिले के रीठी जनपद से कथित अवैध रेत खनन का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत कुम्हरवारा में बेखौफ चल रहे इस खेल को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। शिकायतकर्ता ईश्वरी चक्रवर्ती का आरोप है कि उन्होंने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई से लेकर, खनिज विभाग, वन विभाग, थाना कुठला और यहाँ तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कथित खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अवैध उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

नियमों को ताक पर रखकर पोकलेन और जेसीबी से खुदाई

​शिकायतकर्ता के अनुसार, रीठी तहसील के ग्राम कुम्हरवारा स्थित खसरा नंबर 373 एवं 374 की भूमि पर बिना किसी वैध खनन अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना पर्यावरणीय सके लंबे समय से जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि प्रतिदिन सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टरों के माध्यम से इस अवैध रेत का परिवहन और भंडारण किया जा रहा है।

पर्यावरण और राजस्व को भारी चपत

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कथित अवैध खनन से मध्यप्रदेश शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। वहीं, ओवरलोड भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ गया है। इसके अलावा, नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।


कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर, मिलीभगत का आरोप


​मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने गत 26 मई 2026 को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर इस संबंध में लिखित आवेदन दिया था। आरोप है कि कलेक्टर द्वारा संबंधित अधिकारियों को त्वरित जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

​शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि:

  • ​स्थानीय स्तर पर कुछ जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की शह है।
  • ​ग्राम पंचायत के कतिपय प्रतिनिधियों की इसमें संलिप्तता है।
  • ​वन विभाग के कुछ सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत के कारण ही इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही है।

(नोट: हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।)

कठोर कार्रवाई और जब्ती की मांग

​शिकायतकर्ता ईश्वरी चक्रवर्ती ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि:

  1. ​खनिज, राजस्व और वन विभाग की एक संयुक्त टीम गठित कर तत्काल मौके पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  2. ​अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त जेसीबी, पोकलेन, डंपर और ट्रैक्टरों को जब्त किया जाए।
  3. ​दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम तथा खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

अधिकारी की प्रतिक्रिया का इंतजार

​फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि शिकायतकर्ता के आरोपों में जरा भी सत्यता है, तो यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी राजस्व की चोरी, पर्यावरण विनाश और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या माफियाओं का यह खेल यूं ही जारी रहता है।घ



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