हाईकोर्ट की राहत का दावा भी बेअसर, आदिवासी परिवार का आशियाना जमींदोज!

​62 वर्षीय बुजुर्ग की कलेक्टर परिसर में सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी; प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप


विशेष रिपोर्ट | कटनी 

​मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक बार फिर 'बुलडोजर संस्कृति' पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कौड़िया में एक 62 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग के मकान को प्रशासनिक अमले द्वारा ढहाए जाने का सनसनीखेज मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके पास माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का स्टे ऑर्डर (राहत) था, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की गई। न्याय न मिलने पर पीड़ित ने सात दिनों के भीतर पूरे परिवार सहित कलेक्टर परिसर में आत्महत्या करने की लिखित चेतावनी दी है।

​"हाथ जोड़ती रही पत्नी, जबरन बाहर निकाल कर चलाया बुलडोजर"


​पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और झकझोर देने वाले हैं। घटना के समय घर के मुखिया मौजूद नहीं थे। पीड़ित की पत्नी का आरोप है कि:

​"मैंने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हाथ जोड़े, पैर पकड़े और गुहार लगाई कि हमारे पास कोर्ट की राहत है, हमारा आशियाना मत उजाड़ो। लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। महिला पुलिस और अधिकारियों ने मुझे जबरन घसीटकर घर से बाहर निकाला और देखते ही देखते हमारी बरसों की गृहस्थी को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।"


​जब घर का मुखिया मौके पर पहुंचा, तो अपनी जीवनभर की कमाई को मिट्टी में मिला देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित का आरोप है कि सरकारी अभिलेखों (रिकॉर्ड) में जानबूझकर हेरफेर कर इस अवैध कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।

​जनसुनवाई से हाईकोर्ट तक... सिर्फ मिलीं तारीखें, नहीं मिला न्याय

​पीड़ित बुजुर्ग के अनुसार, वह अपने इस आशियाने को बचाने के लिए पिछले कई महीनों से शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहा था। जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाली 'जनसुनवाई' में खुद कलेक्टर के समक्ष भी गुहार लगाई गई थी।

  • पीड़ित का दावा: मामले में माननीय हाईकोर्ट से राहत (स्टे) मिली हुई थी।
  • आरोप: प्रशासनिक अधिकारियों ने अदालती आदेशों की अवहेलना करते हुए बिना किसी ठोस पूर्व सूचना के यह दंडात्मक कार्रवाई की।

​7 दिनों का अल्टीमेटम: "न्याय दो या हमें सामूहिक आत्मदाह की अनुमति दो"

​प्रशासनिक रवैये से पूरी तरह टूट चुके आदिवासी परिवार ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पीड़ित बुजुर्ग ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि:

​"यदि अगले सात दिनों के भीतर इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं की गई, दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और हमें मुआवजा नहीं मिला, तो मैं अपने पूरे परिवार के साथ कलेक्टर परिसर में आत्मदाह करने के लिए विवश हो जाऊंगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी कटनी जिला प्रशासन की होगी।"


​स्थानीय जनता में आक्रोश, उठ रहे हैं तीखे सवाल

​इस घटना के बाद से ग्राम कौड़िया और पूरे बहोरीबंद क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई की घोर निंदा की है। क्षेत्र में इस बात को लेकर तीखी चर्चा है कि:

  1. कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: यदि पीड़ित के पास हाईकोर्ट की राहत थी, तो किस आदेश के तहत बुलडोजर चलाया गया?
  2. मानवीय दृष्टिकोण का अभाव: क्या एक गरीब आदिवासी परिवार को बेघर करने से पहले उनके पुनर्वास या पक्ष सुनने की ज़हमत उठाई गई?
  3. रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका: पीड़ित के 'अभिलेखों में गड़बड़ी' के आरोपों की जांच कौन करेगा?

​प्रशासन का पक्ष (अभी प्रतीक्षित/अस्पष्ट)

इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। क्या यह जमीन वाकई किसी सरकारी अतिक्रमण के दायरे में थी, या फिर वाकई यह प्रशासनिक तानाशाही का शिकार हुई, यह जांच का विषय है। (नोट: यदि अधिकारी का बयान मिल गया हो, तो यहाँ जोड़ें).

ब्यूरो रिपोर्ट




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