कटनी जिला प्रशासन 'सुप्त अवस्था' में, हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाकर कैलवारा खुर्द में फिर तनीं अवैध दुकानें

रसूख और दबंगई के आगे नतमस्तक हुआ कानून: याचिका क्रमांक WP-26314-2021 में पूर्व में जमींदोज हो चुकी दुकानों का उपसरपंच भूषण पाठक ने दोबारा करा दिया निर्माण, जिम्मेदार मौन।

 कटनी

​न्यायालय के आदेश का सम्मान और उसका अक्षरशः पालन कराना जिस जिला प्रशासन की पहली और संवैधानिक जिम्मेदारी होती है, जब वही प्रशासन 'कुंभकर्णी नींद' सो जाए, तो दबंगों के हौसले आसमान छूने लगते हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज और कानून व्यवस्था को सरेआम ठेंगा दिखाने वाला मामला कटनी जिले के ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द से सामने आया है। यहाँ माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर) के जिस कड़े आदेश के तहत पूर्व में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर अवैध दुकानों को हटाया गया था, आज उसी जगह पर दबंगई के दम पर पुनः पांच अवैध दुकानें सीना ताने खड़ी हैं।

​माननीय उच्च न्यायालय (म.प्र.) का वह आदेश जिसे ठेंगा दिखाया गया:

  • याचिका क्रमांक (WP No.): WP No. 26314 of 2021 (सुरेंद्र मोहन मिश्रा एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य)
  • आदेश की तारीख: 04 दिसंबर 2021 (04-12-2021)
  • पीठ (Hon'ble Judge): माननीय न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल (Justice Vivek Agarwal)
  • प्रभावित भूमि: खसरा नंबर 326/2, रकबा 0.753 हेक्टेयर, ग्राम कैलवारा खुर्द, जिला कटनी
  • प्रशासनिक संदर्भ: नायब तहसीलदार के आदेश दिनांक 08/03/2021 एवं अनुविभागीय अधिकारी (SDO) कटनी के आदेश दिनांक 18/08/2021 के क्रियान्वयन का निर्देश।

​क्या है पूरा कानूनी मामला?

​मामला ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द की बेशकीमती शासकीय भूमि का है। प्राप्त अदालती आदेश के अनुसार, इस भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए नायब तहसीलदार ने दिनांक 08/03/2021 और तत्पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (SDO) कटनी ने दिनांक 18/08/2021 को बेदखली का स्पष्ट आदेश पारित किया था। जब स्थानीय स्तर पर इस प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं कराया गया, तब याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट की शरण ली।

​माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका क्रमांक WP-26314-2021 पर सुनवाई करते हुए दिनांक 04-12-2021 को जिला कलेक्टर कटनी को सख्त निर्देश जारी किए थे कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करें और 30 दिनों के भीतर पूर्व के आदेशों का पालन करवाते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा इसकी रिपोर्ट न्यायालय की रजिस्ट्री में सौंपें। हाई कोर्ट के इसी डंडे के डर से पूर्व में प्रशासन ने इन अवैध दुकानों को मलबे में तब्दील कर दिया था।

​हाई कोर्ट की कार्रवाई के बाद बढ़ा दबंग का दुस्साहस

​लेकिन कहानी में असली मोड़ कानून की इसी कार्रवाई के बाद आया। अदालती और प्रशासनिक कार्रवाई को सीधे चुनौती देते हुए पूर्व सरपंच माधुरी पाठक के पति और वर्तमान में उपसरपंच भूषण पाठक ने अपनी दबंगई का अनूठा कारनामा पेश किया। कटनी जिला प्रशासन की नाक के नीचे, हाई कोर्ट के आदेश से जमींदोज की जा चुकी दुकानों की जगह पर अपनी दबंगई के बल पर दोबारा पांच अवैध दुकानों को रातों-रात खड़ा कर दिया गया।

​प्रशासन की 'मौन' सहमति या लाचारी?

​इस पूरे दुस्साहस ने कटनी जिला प्रशासन की कार्यशैली और नीयत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कटनी का जिला प्रशासन इस समय पूर्णतः 'सुप्त अवस्था' (गहरी नींद) में विलीन है। जनता अब सरेआम यह सवाल पूछ रही है कि:

  • ​आखिर जिला प्रशासन की ऐसी क्या राजनीतिक या व्यक्तिगत मजबूरी है कि वह एक उपसरपंच की दबंगई के आगे इतना बेबस और लाचार नजर आ रहा है?
  • ​माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश (दिनांक 04-12-2021) की ऐसी सरेआम अवहेलना होने के बाद भी आज दिनांक तक इन दोबारा निर्मित अवैध दुकानों पर प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) क्यों नहीं चला?
  • ​क्या कटनी जिले में रसूखदारों और रसूख विहीन आम नागरिकों के लिए कानून के मायने अलग-अलग हैं?
  • स्थानीय निवासियों का आक्रोश: "जब कोई गरीब या आम आदमी अपनी निजी जमीन पर भी छोटा-मोटा निर्माण करता है, तो प्रशासन का अमला नाप-जोख करने और नोटिस थमाने तुरंत पहुँच जाता है। लेकिन यहाँ हाई कोर्ट में केस हारने और दुकानें तोड़े जाने के बाद भी शासकीय खसरा नंबर 326/2 पर दोबारा अवैध मार्केट खड़ा हो गया और जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूंदे बैठे हैं। यह सीधे-सीधे न्यायपालिका का अपमान है।"


    ​क्या फिर जागेगा प्रशासन या ठंडे बस्ते में रहेगा न्याय?

    ​कैलवारा खुर्द में सीना ताने खड़ी ये पांच अवैध दुकानें केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं हैं, बल्कि यह कटनी जिला प्रशासन की उदासीनता, सुस्ती और दबंगई के आगे प्रशासनिक आत्मसमर्पण का जीता-जागता सबूत हैं। अब देखना यह होगा कि याचिका क्रमांक WP-26314-2021 के इस पुख्ता अदालती दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद कटनी कलेक्टर और प्रशासनिक अमला अपनी 'सुप्त अवस्था' से बाहर आता है या फिर उपसरपंच के रसूख के आगे हाई कोर्ट का यह ऐतिहासिक आदेश ऐसे ही फाइलों में धूल फांकता रहेगा।


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