​सूत्रो के हवाले से

कटनी आरटीओ में 'अघोषित किंगमेकर': दो प्राइवेट गुर्गे चला रहे हैं परिवहन विभाग, आरटीओ पर लग रहे गंभीर आरोप दो मे से एक पर पहले भी लग चुके है लेनदेन के गंभीर आरोप 

कटनी। सरकारी विभागों में बिचौलियों और 'प्राइवेट कारिंदों' का दखल कोई नई बात नहीं है, लेकिन कटनी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से जो खबरें छनकर सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। 'विश्वस्त सूत्रों' के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, कटनी तत्कालीन  RTO के समानांतर दो ऐसे रसूखदार 'प्राइवेट' व्यक्ति सक्रिय हैं, जिन्होंने पूरे आरटीओ दफ्तर को अपने कब्जे में ले रखा है।

​हैरानी की बात यह है कि ये दोनों व्यक्ति न तो परिवहन विभाग के कर्मचारी हैं और न ही इनके पास कोई कानूनी अधिकार है। इसके बावजूद, कटनी आरटीओ का पूरा दारोमदार इन्हीं दो चेहरों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

वाहन चेकिंग से लेकर 'वसूली' तक... बिना इनकी मर्जी पत्ता भी नहीं हिलता

​सूत्रों का दावा है कि इन दोनों प्राइवेट व्यक्तियों की हैसियत आरटीओ संतोष पाल के बेहद करीबी और 'खास सिपहसालार' जैसी है। आलम यह है कि परिवहन विभाग का सबसे संवेदनशील और विशेष कार्य यानी 'वाहन चेकिंग' भी इन दोनों की रजामंदी और सीधी देखरेख में किया जा रहा है।

सूत्रों का बड़ा खुलासा:

"सड़कों पर जब आरटीओ की टीम चेकिंग के लिए निकलती है, तो पर्दे के पीछे से कमान यही दो शख्स संभालते हैं। किस गाड़ी को छोड़ना है, किस पर कार्रवाई करनी है और किससे 'विशेष सामंजस्य' बिठाना है, यह सब कुछ आरटीओ साहब नहीं, बल्कि ये दो रसूखदार तय करते हैं।"


तमाम 'लेनदेन' के अघोषित केंद्र

​आरटीओ दफ्तर में होने वाले हर छोटे-बड़े वित्तीय लेनदेन (कथित अवैध वसूली और दलाली) का जिम्मा भी इन्हीं दो कंधों पर है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आरटीओ संतोष पाल सीधे तौर पर किसी भी तरह के वित्तीय मामलों में हाथ नहीं डालते। तमाम तरह के 'लेनदेन' को ठिकाने लगाने और उसे सुरक्षित रूप से मैनेज करने का काम इन दोनों प्राइवेट व्यक्तियों को सौंप दिया गया है।

​दफ्तर में आने वाले एजेंटों और बड़े वाहन स्वामियों को साफ संदेश है— "अगर काम कराना है, तो साहब से नहीं, बल्कि इन दो 'खास' लोगों से हरी झंडी लेनी होगी।"

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

​इस सनसनीखेज खुलासे के बाद कटनी के प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में हड़कंप मचना तय है। जनता और जागरूक नागरिकों द्वारा अब सीधे तौर पर ये सवाल उठाए जा रहे हैं:

  • सवाल 1: एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी (आरटीओ) ने गोपनीय और संवेदनशील विभागीय कार्यों की कमान दो बाहरी और अवैधानिक व्यक्तियों को कैसे सौंप दी?
  • सवाल 2: क्या उच्च अधिकारियों और परिवहन मंत्रालय को इस 'समानांतर व्यवस्था' की भनक नहीं है?
  • सवाल 3: सरकारी गाड़ी और सरकारी धौंस का इस्तेमाल करने वाले ये दो प्राइवेट लोग आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?

बड़ा सवाल: कब होगी उच्च स्तरीय जांच?

​कटनी आरटीओ में चल रहा यह खेल न सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि सरकारी गोपनीयता भंग होने का भी बड़ा जरिया बन चुका है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद परिवहन कमिश्नर और जिला प्रशासन आरटीओ संतोष पाल और उनके इन दो 'प्राइवेट साये' पर क्या एक्शन लेते हैं।

 रिपोर्ट, कटनी।

Disclaimer (अस्वीकरण): यह रिपोर्ट पूरी तरह से सूत्रों से मिली जानकारी और दावों पर आधारित है। जनता की आवाज न्यूज इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग करता है।


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