हादसों का 'ब्लैक स्पॉट' बना लमतरा ओवरब्रिज

14 जून के दर्दनाक हादसे से भी प्रशासन ने नहीं लिया सबक; क्या किसी और बड़ी तबाही का इंतजार कर रहा है जिला प्रशासन?

कटनी 

बीती 14 जून को लमतरा ओवरब्रिज के पास बने उस अंधे मोड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। चीख-पुकार, खून से सनी सड़कें और एंबुलेंस के सायरन की आवाज ने पूरे इलाके को दहला दिया था। लेकिन इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है और ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।

​## अंधा मोड़... साक्षात यमराज का घर!

​स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि लमतरा ओवरब्रिज के पास का यह अंधा मोड़ किसी सुसाइड पॉइंट से कम नहीं है।

  • नो साइन बोर्ड: मोड़ से पहले न तो कोई स्पीड ब्रेकर है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।
  • अंधेरे का साम्राज्य: रात के समय यहाँ स्ट्रीट लाइट्स की मुकम्मल व्यवस्था न होने से खतरा दोगुना हो जाता है।
  • रफ्तार पर नहीं कोई लगाम: भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार इस अंधे मोड़ पर काल बनकर दौड़ती है।
  • "14 जून को जब यहाँ भिड़ंत हुई, तो लगा था कि अब प्रशासन जागेगा। यहाँ कुछ कड़े कदम उठाए जाएंगे, स्पीड गवर्नर या रिफ्लेक्टर लगाए जाएंगे। लेकिन आज भी गाड़ियां उसी रफ्तार से और उसी खतरे के बीच गुजर रही हैं। प्रशासन को शायद इंसानी जान की कोई कीमत नहीं दिखती।"

    रमेश यादव, स्थानीय निवासी


    ​## सवालों के घेरे में जिला प्रशासन: जनता पूछ रही है ये 3 बड़े सवाल

    क्र.सं.

    जिला प्रशासन से सीधे सवाल

    1.

    हादसे के बाद पीडब्ल्यूडी (PWD) और यातायात पुलिस ने इस 'ब्लैक स्पॉट' का संयुक्त दौरा क्यों नहीं किया?

    2.

    इस अंधे मोड़ को सीधा करने या यहाँ पर गति अवरोधक (Speed Breaker) लगाने में तकनीकी अड़चन क्या है?

    3.

    क्या प्रशासन को हर बार जागने के लिए किसी बड़े हादसे और मासूमों की बलि की जरूरत होती है?

    ## कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर

    ​हर बड़े हादसे के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की तरफ से 'यातायात सुधार सप्ताह' और 'सड़क सुरक्षा' के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं। बैठकों का दौर चलता है, चाय की चुस्कियों के साथ योजनाएं बनती हैं, लेकिन लमतरा ओवरब्रिज की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। 14 जून से लेकर आज तक, यहाँ सुरक्षा का एक सिपाही या एक अदद रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाया जा सका है।

    ​### अब आर-पार के मूड में जनता

    ​लमतरा और आसपास के ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है। लोगों का साफ कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों के भीतर इस अंधे मोड़ पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (जैसे- रंबल स्ट्रिप्स, लाइटिंग और बड़ा साइन बोर्ड) नहीं किए गए, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

     निष्कर्ष:

    हादसे अचानक नहीं होते, वे प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा होते हैं। लमतरा ओवरब्रिज का यह अंधा मोड़ इस समय एक टाइम बम की तरह है। जिला प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा, इससे पहले कि 14 जून जैसी कोई और काली तारीख इस शहर के इतिहास में दर्ज हो जाए।



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