कटनी MPWLC में प्रशासनिक 'सस्पेंस': दो अधिकारी, एक कुर्सी; पूर्व अधिकारी से छीने अधिकार, क्या यह बिना आदेश की कोई 'सज़ा'?
कटनी (मध्य प्रदेश)
कटनी:
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) का कटनी कार्यालय इन दिनों एक अनूठे प्रशासनिक ढर्रे और चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। सामान्य तौर पर जब किसी शासकीय अधिकारी का स्थानांतरण (Transfer) होता है, तो नए अधिकारी के प्रभार लेते ही पूर्व अधिकारी को नए पदस्थान के लिए भारमुक्त (Relieve) कर दिया जाता है। लेकिन कटनी MPWLC में जो चल रहा है, उसे देखकर कर्मचारी और आम जनता दोनों हैरान हैं।
यहाँ एक नए अधिकारी का ट्रांसफर होकर आगमन होता है, वे विधिवत पूरा प्रभार ग्रहण करते हैं और अपना कामकाज शुरू कर देते हैं। हैरतअंगेज़ बात यह है कि पूर्व से पदस्थापित अधिकारी योगेंद्र सिंह सेंगर को भी इसी कार्यालय में बनाए रखा गया है। लेकिन twist यह है कि उनके पास अब किसी भी प्रकार के अधिकार या निर्णय लेने की शक्तियाँ नहीं हैं।
बिना अधिकार के बैठने को मजबूर: क्या यह कोई मानसिक सजा?
प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल तेजी से कौंध रहा है कि आखिर विभाग की मंशा क्या है? किसी अधिकारी से उसके वित्तीय, प्रशासनिक और नीतिगत अधिकार छीनकर उसे महज़ कार्यालय में 'बिना काम' बैठने के लिए छोड़ देना, किसी भी स्वाभिमानी अधिकारी के लिए अप्रत्यक्ष सज़ा से कम नहीं है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि:
- कार्यशैली पर असर:
- अधिकार विहीन करके बैठाए रखने से अधिकारी का नैतिक मनोबल टूटता है।
- सरकारी संसाधनों की बर्बादी:
- जब एक पद पर कार्य करने के लिए नया अधिकारी मौजूद है, तो पूर्व अधिकारी को बिना किसी कार्य-आवंटन के वेतन देना और बनाए रखना राजस्व एवं सरकारी तंत्र का दुरुपयोग है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल: आख़िर विभाग का प्लान क्या है?
इस पूरे मामले ने कई यक्ष प्रश्नों को जन्म दे दिया है, जिनका जवाब MPWLC के उच्च अधिकारियों को देना ही होगा:
- क्या जल्द होगा ट्रांसफर?
- क्या MPWLC मुख्यालय पूर्व अधिकारी योगेंद्र सिंह सेंगर का स्थानांतरण किसी अन्य स्थान पर करने की तैयारी में है, या यह मामला केवल लालफीताशाही (Red Tapism) का शिकार होकर अटक गया है?
- क्या अन्यत्र मिलेगा पूर्ण अधिकार?
- यदि योगेंद्र सिंह सेंगर का ट्रांसफर किया जाता है, तो क्या उन्हें किसी नई जगह पर पूर्ण प्रशासनिक अधिकारों के साथ नई ज़िम्मेदारी दी जाएगी?
- या फिर यह किसी 'पनिशमेंट' की पटकथा है?
- सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि क्या कटनी में निर्मित हुई यह स्थिति योगेंद्र सिंह सेंगर को किसी अनौपचारिक 'सज़ा' या 'पनिशमेंट पोस्टिंग' के तहत झेलनी पड़ रही है?
क्या कहते हैं नियम और परंपराएं?
शासकीय सेवा नियमों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं है, तो उसे इस तरह "अधिकारविहीन" (Without Portfolio) बनाकर एक ही टेबल/शाखा पर बनाए रखना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। यदि कोई आंतरिक जांच या कार्रवाई का विषय है, तो भी विभाग को स्पष्ट आदेश जारी करने चाहिए, न कि अधिकारी को अधर में लटकाकर रखना चाहिए।
निष्कर्ष: पारदर्शी जवाबदेही की दरकार
MPWLC कटनी का यह मामला केवल दो अधिकारियों की कुर्सी की लड़ाई या प्रशासनिक व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा धब्बा है। मुख्यालय को इस स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए—ताकि न केवल योगेंद्र सिंह सेंगर जैसे अधिकारियों के सम्मान की रक्षा हो सके, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन भी कायम रहे।
अब देखने वाली बात यह होगी कि MPWLC का शीर्ष प्रबंधन इस गंभीर सवाल पर क्या कदम उठाता है
नोट-इस विषय पर अधिकारियो की प्रतिक्रिया अभी आना बाकी है प्रतिक्रिया या आदेश प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा


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