कटनी वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन में घोटालों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप!
जिला प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर के 5 वर्षों के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हेतु भाजपा जिलाध्यक्ष को सौंपा गया शिकायत पत्र
कटनी। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन, जिला कटनी के जिला प्रबंधक श्री योगेंद्र सिंह सेंगर के बीते 5 वर्षों के कार्यकाल को लेकर भ्रष्टाचार, अवैध संपत्तियों और वित्तीय अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी (कटनी) को सौंपे गए एक शिकायती पत्र के बाद प्रशासनिक एवं राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पत्र में जिला प्रबंधक एवं उनसे जुड़े कर्मचारियों पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
बेनामी संपत्ति और अवैध भूमि क्रय के आरोप
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि जिला प्रबंधक के कार्यकाल के दौरान अवैध एवं संदिग्ध माध्यमों से भूमि का क्रय किया गया है, जो कथित तौर पर अतुल रजक के नाम पर दर्ज है।
- जांच की मांग: भूमि क्रय के स्रोत, भुगतान माध्यमों और इसके पीछे के वास्तविक हितधारकों की विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई गई है।
शिकायत पत्र में उजागर किए गए 8 प्रमुख आरोप:
- CMR चावल जमा एवं भुगतान में रिश्वत: CMR चावल जमा करने और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के एवज में प्रति प्रकरण लगभग ₹1,000 की कथित अवैध राशि वसूली जाती है।
- गेन/अंतर (Gain/Diff) राशि में अनधिकृत हिस्सेदारी: विभिन्न गोदामों में आने वाले स्टॉक के अंतर/गेन की राशि में अनुचित हिस्सेदारी लेने की शिकायतें हैं। इसके लिए गोदामों के वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच आवश्यक बताई गई है।
- गोदाम प्रभारियों की अनुपातहीन संपत्ति: कुछ गोदाम प्रभारियों की संपत्ति उनकी सरकारी आय और वेतनमान की तुलना में संदिग्ध रूप से काफी अधिक पाई गई है।
- चहेते गोदाम मालिकों व ठेकेदारों को लाभ: अपनी पसंद के गोदाम मालिकों एवं परिवहनकर्ताओं को नियम विरुद्ध कार्य आवंटित करने और इसके बदले कथित रूप से मोटी रकम लेने का आरोप है।
- परिवहन वाहनों को बेवजह हॉल्ट (Halt) कराना: जिन परिवहनकर्ताओं का सीधे प्रशासनिक सांठगांठ से संबंध नहीं है, उनके वाहनों को जानबूझकर रोका/हॉल्ट कराया जाता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
- रिकॉर्ड्स की निष्पक्ष स्वतंत्र जांच: CMR, भुगतान, गेन/अंतर, स्टॉक और परिवहन से जुड़े समस्त रिकॉर्ड्स की किसी स्वतंत्र व निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।
- अवैध वसूली का नेटवर्क: आरोप है कि गोदाम प्रभारियों एवं अन्य निचले कर्मचारियों के माध्यम से वसूली का एक संगठित नेटवर्क चलाया जाता है और यह राशि वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है।
- कम वेतनभोगी कर्मचारी की बेहिसाब संपत्ति: आर.बी. एसोसिएट से संबंधित कर्मचारी नीरज दुबे (जिसका मासिक वेतन लगभग ₹8,000 बताया गया है) द्वारा कथित रूप से अर्जित अकूत संपत्ति और उसकी आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
पुरानी फाइल दबाने और दबाए गए प्रकरण को पुन: खोलने की मांग
शिकायत पत्र में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी किया गया है कि पूर्व में इस विषय से संबंधित एक जांच प्रकरण माननीय अध्यक्ष महोदय की नोटशीट के माध्यम से शुरू किया गया था। लेकिन, बाद में उस प्रकरण पर कोई अपेक्षित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई गई और कथित रूप से लेनदेन करके फाइल को दबा दिया गया।
पत्र में मांग की गई है कि उस पूर्व फाइल, नोटशीट और संबंधित संपूर्ण अभिलेखों को पुनः प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके और दोषियों पर कठोर कार्यवाही हो सके।
(यह समाचार प्राप्त शिकायत एवं उसमें अंकित तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। )


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