आम रास्ते पर बेरिकेडिंग से किसान हलकान: 100 साल पुराने मार्ग पर दीवार खींचने का आरोप, तहसीलदार व पुलिस से गुहार
विशेष रिपोर्ट — ग्राम मूड़पार (रीठी/कटनी)
कटनी। जिले के बिलहरी तहसील अंतर्गत ग्राम मूड़पार (थाना रीठी) में एक बार फिर भूमि विवाद और रास्ते के अधिकार को लेकर माहौल गरमा गया है। वर्षों पुराने पारंपरिक रास्ते पर पक्की दीवार निर्माण कर उसे बंद किए जाने का मामला सामने आया है। इससे क्षेत्र के लगभग 40 से 50 किसानों और ग्रामीणों के खेतों तक आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित पक्ष एवं ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और रास्ते को तत्काल बहाल कराने हेतु तहसीलदार बिलहरी तथा थाना प्रभारी रीठी को लिखित आवेदन सौंपा है।
क्या है पूरा मामला? (न्याय-संगत पक्ष)
प्राप्त जानकारी और प्रशासन को दिए गए आवेदनों के अनुसार:
- शिकायतकर्ता का पक्ष: ग्राम मूड़पार निवासी मुलायम सिंह (पिता दयाराम सिंह) का कहना है कि वे खसरा नंबर 541 (रकबा 0.25) पर दशकों से खेती करते आ रहे हैं। उनके अनुसार, इस भूमि के समीप खसरा नंबर 543 से होकर लगभग 100 वर्षों से आम रास्ता संचालित था, जिससे आधा दर्जन से अधिक किसान अपने खेतों तक आते-जाते थे।
- विवाद की वजह: शिकायत में उल्लेख किया गया है कि खसरा नंबर 543 (रकबा 0.04 हेक्टेयर) निजी भूमि है, जिसे कुछ वर्षों पूर्व अजय कुमार यादव द्वारा खरीदा गया था। आरोप है कि बीते दिनों इस निजी भूमि पर स्थित रास्ते के हिस्से में पक्की दीवार खड़ी कर दी गई, जिससे आम जनता का निस्तार व किसानों का आवागमन बाधित हो गया है।
सामाजिक प्रभाव और ग्रामीणों की मांग
रास्ता बंद होने के कारण खेतों में कटाई, बुआई और कृषि यंत्रों के ले जाने में भारी बाधा आ रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि कोई रास्ता वर्षों से 'सुखाधिकार' (Easementary Rights) के तहत आम उपयोग में रहा हो, तो उसे अचानक बंद करने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं।
प्रशासन को सौंपे गए आवेदन पर मुन्नी बाई, रावेन्द्र सिंह, भानू सिंह, रामसेवक यादव, राजेन्द्र प्रसाद यादव, बिदुर यादव, बद्री प्रसाद गुप्ता, लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता एवं अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान मौजूद हैं।
⚖️ कानूनी व प्रशासनिक पहलू (न्याय-संगत दृष्टिकोण)
1. सुखाधिकार (Right of Easement): भारतीय सुखाधिकार अधिनियम के अनुसार, यदि कोई मार्ग दशकों से बिना रुकावट के आम उपयोग में लाया जा रहा है, तो उस पर ग्रामीणों का पारंपरिक अधिकार बनता है।
2. प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता: राजस्व विभाग (तहसीलदार) को स्थल निरीक्षण कर यह तय करना होगा कि क्या वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है या खसरा नंबर 543 में स्थित रास्ता ही एकमात्र सुलभ मार्ग है।
3. शांति व्यवस्था: पुलिस प्रशासन (रीठी थाना) और राजस्व अमले के संयुक्त निरीक्षण से ही दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करते हुए निष्पक्ष समाधान निकाला जा सकता है।
प्रशासनिक रुख का इंतजार:
मामले में ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा नंबर 543 में निर्मित दीवार का सीमांकन व जांच कराकर उसे हटवाया जाए ताकि
किसानों की अपूरणीय क्षति न हो। अब देखना यह होगा कि राजस्व प्रशासन इस पर क्या वैधानिक कार्रवाई करता है।



Comments
Post a Comment