MPWLC कटनी: अधिकारियों के साए में पलते आउटसोर्स कर्मचारियों के बेखौफ बोल, पत्रकारों को 'मुक्ति' दिलाने की धमकी!
कटनी। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) कटनी का कार्यालय इन दिनों प्रशासनिक ढ्रापे और कथित अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। बीते 19 सितंबर 2026 को दोपहर लगभग 11:00 से 1:00 बजे के बीच कार्यालय परिसर में एक ऐसी घटना घटी, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर मीडिया जगत तक में खलबली मचा दी है।
प्रभार का सवाल और आउटसोर्स कर्मचारी की गुंडागर्दी
घटनाक्रम के अनुसार, 19 सितंबर को कटनी के चार वरिष्ठ पत्रकार—शैलेंद्र तिवारी, मनोज सिंह परिहार, नीरज पांडे और नरेश बजाज—एमपीडब्ल्यूएलसी के क्वालिटी कंट्रोल (QC) अधिकारी योगेंद्र सिंह सेंगर से आधिकारिक प्रतिक्रिया (बाइट) लेने पहुंचे थे। पत्रकारों का सवाल सीधा और वाजिब था कि नया अधिकारी आए एक महीना बीत जाने के बाद भी अब तक प्रभार का हस्तांतरण क्यों नहीं हुआ?
पत्रकार अधिकारी से बात कर ही रहे थे कि वहां मौजूद एक आउटसोर्स कर्मचारी नीरज दुबे मीडियाकर्मियों की मोबाइल से फोटो खींचने लगा। जब पत्रकार मनोज सिंह परिहार ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि वह बिना अनुमति उनकी तस्वीरें क्यों ले रहा है, तो नीरज दुबे का जवाब न केवल आपत्तिजनक था, बल्कि अत्यंत चौंकाने वाला भी था।
"आप लोगों को मुक्ति दिलवानी है..."
— नीरज दुबे (आउटसोर्स कर्मचारी)
एक ऑन-रोल सीनियर अधिकारी की मौजूदगी में एक आउटसोर्स कर्मचारी द्वारा मीडियाकर्मियों को 'मुक्ति' (जान से मारने या गंभीर अंजाम भुगतने का परोक्ष इशारा) दिलाने की धमकी देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या अब एमपीडब्ल्यूएलसी कटनी का दफ्तर मीडियाकर्मियों के लिए मोक्ष और मुक्ति का केंद्र बनने जा रहा है?
बड़ा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है यह दुस्साहस?
किसी भी शासकीय कार्यालय में एक आउटसोर्स कर्मचारी का इतना दुस्साहस होना बिना किसी विभागीय या राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं लगता।
- अधिकारियों की चुप्पी: सीनियर ऑन-रोल अधिकारी के सामने घटना घटित होने के बावजूद कर्मचारी पर तत्काल कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई न होना अधिकारियों की मूक सहमति या साठगांठ की ओर इशारा करता है।
- जवाबदेही से भागता प्रशासन: क्या कटनी एमपीडब्ल्यूएलसी में आउटसोर्स कर्मचारियों को पत्रकारों और आम जनता को धमकाने का खुला लाइसेंस दे दिया गया है?
2015 के बाद से संपत्ति में असाधारण उछाल: जांच एजेंसियों के दायरे में नीरज दुबे!
यह मामला सिर्फ मीडियाकर्मियों को धमकी देने तक सीमित नहीं है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, वर्ष 2015 के बाद से ओपन कैप (धान व अनाज भंडारण) में हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के बाद से आउटसोर्स कर्मचारी नीरज दुबे की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व उछाल आया है।
- अकूत संपत्ति का निर्माण: एक मामूली वेतन पाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी की संपत्ति में दुगनी या चौगुनी नहीं, बल्कि 100 से 500 गुना तक का इजाफा होना गंभीर संदेह पैदा करता है।
- जांच की मांग: क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और वरिष्ठ पत्रकारों ने मांग की है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेना चाहिए।
पारदर्शी जांच की दरकार
चौथे स्तंभ पर हमला और लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकारों को खुलेआम धमकियां देना बेहद चिंताजनक स्थिति है। यदि एक आउटसोर्स कर्मचारी खुद को कानून और प्रशासन से ऊपर समझने लगे, तो शासकीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि कटनी जिला प्रशासन और एमपीडब्ल्यूएलसी के उच्च अधिकारी इस बेलगाम आउटसोर्स कर्मचारी पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर इस गंभीर मामले को भी लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

Comments
Post a Comment