​ जिला अस्पताल प्रांगण में नियम ताक पर: सरकारी आवास, सरकारी संसाधन... पर कमाई निजी! आखिर प्रबंधन क्यों है खामोश?

​ डॉ. आरती सोधिया के शासकीय आवास पर बरसों से निजी क्लिनिक का संचालन; मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राज सिंह और सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।

​कटनी (विशेष संवाददाता):

जिला अस्पताल कटनी, जो जिले भर के गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए नि:शुल्क व किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र माना जाता है, वहां की व्यवस्थाओं पर अब गंभीर प्रशासनिक प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। अस्पताल प्रांगण में स्थित शासकीय आवास, जो पूर्णतः स्वास्थ्य विभाग के संसाधनों से संचालित और संधारित होता है, वहां खुलेआम निजी अस्पताल/क्लिनिक की दुकानें सजाई जा रही हैं।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल प्रांगण में आवंटित शासकीय आवास से डॉ. आरती सोधिया द्वारा विगत कई वर्षों से निजी क्लिनिक का बेधड़क संचालन किया जा रहा है। मरीज सरकारी परिसर में आते हैं, लेकिन इलाज और जांच के नाम पर निजी आय अर्जित की जा रही है।

​बड़ा सवाल: संसाधन सरकारी, मुनाफा व्यक्तिगत?

​शासकीय आवास में बिजली, पानी, सुरक्षा और परिसर के अन्य संसाधन सरकार के होते हैं, जो आम जनता के टैक्स के पैसे से मुहैया कराए जाते हैं। इन संसाधनों की आड़ में जब कोई चिकित्सा अधिकारी शासकीय परिसर के भीतर से ही प्राइवेट प्रैक्टिस कर लाखों रुपये की निजी आय अर्जित करता है, तो यह सीधे तौर पर शासकीय नियमों और पद के नैतिक उत्तरदायित्व का उल्लंघन है।

​प्रशासनिक मौन पर उठती उंगलियां

​इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू जिला अस्पताल प्रबंधन का रवैया है। स्वास्थ्य महकमे के सर्वोच्च अधिकारियों—मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राज सिंह एवं सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा—की नाक के नीचे यह पूरा तंत्र बरसों से सक्रिय है। इसके बावजूद अब तक इस विषय पर कोई प्रशासनिक संज्ञान या जांच की कार्रवाई नहीं की गई है।

​अस्पताल की इस अनदेखी से कई यक्ष प्रश्न खड़े हो रहे हैं:

  • ​क्या संरक्षण प्राप्त है? क्या इतने लंबे समय से चल रहे इस कारोबार को स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है?
  • ​आंखें मूंदकर क्यों बैठा है प्रबंधन? जब शासकीय आवास के भीतर निजी क्लीनिक की चर्चाएं आम हैं, तब भी जिला अस्पताल प्रबंधन कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रहा?
  • ​राजस्व की हानि और नियमों की धज्जियां: एनपीए (नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस) और शासकीय नियमों के तहत ड्यूटी के दौरान या शासकीय परिसरों से इस प्रकार का संचालन प्रतिबंधित होने के बावजूद कार्रवाई से परहेज़ क्यों?

​सिस्टम लाचार या मूकदर्शक?

​जिला अस्पताल कटनी का यह मामला केवल एक डॉक्टर या एक आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य प्रबंधन और प्रशासनिक निष्पक्षता पर एक बड़ा धब्बा है। जब गरीब मरीज दूर-दराज से सरकारी इलाज की आस में आते हैं, तब शासकीय संपत्ति का उपयोग निजी क्लिनिक के रूप में होना जनहित के साथ सीधा खिलवाड़ है।

​अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शासकीय आवास में चल रही इस अवैध प्राइवेट इनकम पर कड़ा संज्ञान लेते हैं या फिर कटनी का स्वास्थ्य महकमा यूं ही लाचार और बेबस मूकदर्शक बना रहेगा।


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