कटनी MPWLC में किसका चलता है 'सिक्का'? क्या जिला QC अधिकारी से भी बड़ा है कर्मचारी नीरज दुबे का रसूख!
सरगम वेयरहाउस को 'ब्लैकलिस्ट' करने की धमकी पर मचा हड़कंप, लिखित शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल।
विशेष संवाददाता, कटनी
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) का कटनी कार्यालय इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली से ज्यादा एक कर्मचारी के "असीमित रसूख" को लेकर चर्चाओं के केंद्र में है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर MPWLC में पदस्थ कर्मचारी नीरज दुबे कौन हैं और उनके पास ऐसी कौन-सी शक्ति है, जिसकी वजह से जिले के वेयरहाउस संचालकों में उनका खौफ देखा जा रहा है?
रसूख के आगे मुख्य अधिकारी भी बेबस?
सूत्रों और स्थानीय वेयरहाउस संचालकों के बीच उठ रहे सवालों पर गौर करें तो चर्चा यह भी है कि क्या नीरज दुबे का रसूख कटनी में पदस्थ मुख्य क्वालिटी कंट्रोल (QC) अधिकारी योगेंद्र सिंह संगर से भी बड़ा हो चुका है?
नियमों के मुताबिक, किसी भी गोदाम/वेयरहाउस में अनाज के भंडारण, गुणवत्ता जांच और तकनीकी मानकों के आधार पर कार्रवाई का अधिकार प्रशासनिक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के पास होता है। लेकिन कटनी में बन रहे हालात यह दर्शाते हैं कि फैसले किसी और ही "पावर सेंटर" से संचालित हो रहे हैं।
सरगम वेयरहाउस का मामला: ब्लैकलिस्ट करने की धमकी
ताजा मामला सरगम वेयरहाउस से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि कर्मचारी नीरज दुबे द्वारा सरगम वेयरहाउस को अपने प्रभाव में लेने अथवा ऐसा न करने पर संस्था को "ब्लैकलिस्ट" करवाने की सीधी धमकी दी गई।
"किसी भी निजी या अनुबंध आधारित वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट करने की एक तय वैधानिक प्रक्रिया होती है। लेकिन एक निचले स्तर के कर्मचारी द्वारा सीधी धमकी दिया जाना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है।" — वेयरहाउसिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्र
इस रवैये से प्रताड़ित होकर सरगम वेयरहाउस प्रबंधन ने मामले की लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों व संबंधित विभाग में दर्ज कराई है।
उठते अहम सवाल:
- पद छोटा, अधिकार बड़े कैसे? क्या नीरज दुबे के पास आधिकारिक रूप से वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट या स्वीकृत करने का अधिकार है? यदि नहीं, तो यह साहस किसके संरक्षण में आ रहा है?
- वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी: क्या कटनी के प्रमुख QC अधिकारी योगेंद्र सिंह संगर और क्षेत्रीय प्रबंधक इस समानांतर पावर सेंटर से अनभिज्ञ हैं या मौन स्वीकृति दी जा रही है?
अब कार्रवाई का इंतजार
शिकायत दर्ज होने के बाद अब गेंद प्रशासनिक पाले में है। वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी इस लिखित शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। क्या निष्पक्ष जांच कर दोषी पर गाज गिरेगी या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा? यह तो आने वाला समय और प्रशासनिक रुख ही तय करेगा।



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