आखिर कब बनेगा पत्रकार सुरक्षा कानून
पत्रकार सुरक्षा कानून: तीन साल पुराना आदेश, एक बैठक और फिर सन्नाटा
विशेष संवाददाता | भोपाल
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। मध्यप्रदेश में 'पत्रकार सुरक्षा कानून' बनाने की पहल अब कागजी फाइलों और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती दिख रही है।
मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: PRE/2/0002/2023-Sec-1-24(PRE)) को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन नतीजा आज भी ढाक के तीन पात है।
कागजों में उलझा आदेश
जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य में कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत एक समिति का गठन भी किया गया था। लेकिन शुरुआती कागजी प्रक्रिया के बाद यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया। समिति की महज एक बैठक हुई और उसके बाद से अब तक सन्नाटा पसरा हुआ है।
मुख्य बिंदु:
- आदेश का विवरण: जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक PRE/2/0002/2023-Sec-1-24(PRE)।
- तीन साल का इंतजार: कानून बनाने की दिशा में तीन साल पहले प्रक्रिया शुरू हुई थी।
- बैठकों का अकाल: समिति का गठन तो हुआ, लेकिन पहली बैठक के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- वर्तमान स्थिति: जमीन पर कानून का कोई नामोनिशान नहीं है।
उठते गंभीर सवाल
फील्ड में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले पत्रकारों के सामने सुरक्षा का संकट लगातार बना हुआ है। समिति बनने के बावजूद बैठकों का न होना और कानून का मसौदा आगे न बढ़ना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पत्रकार जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। फिलहाल, सवाल यही बना हुआ है कि क्या यह कानून कभी धरातल पर उतर पाएगा या फिर यह सिर्फ एक फाइल तक ही सीमित रहेगा?

Comments
Post a Comment