बड़वारा: शिक्षकों की मनमानी से छात्रों का भविष्य अंधकारमय, ई-अटेंडेंस ऐप में सेंध लगाकर ड्यूटी से नदारद
- शासकीय प्राथमिक शाला भादावर के प्रधानाध्यापकों पर गंभीर आरोप
- सुबह ऐप पर उपस्थिति दर्ज कर गायब होते हैं शिक्षक, शाम को कहीं से भी दर्ज होती है रवानगी
- खंड शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच और शोकॉज नोटिस के निर्देश
बड़वारा
शासन द्वारा ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) कानून के तहत हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बड़वारा संकुल अंतर्गत जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शासकीय कनिष्ठ प्राथमिक शाला भादावर एवं शासकीय प्राथमिक शाला भादावर के प्रधानाध्यापकों की घोर लापरवाही और मनमानी के कारण मासूम छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है।
डिजिटल उपस्थिति का उठा रहे अनुचित लाभ
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय कनिष्ठ प्राथमिक शाला भादावर के प्रधानाध्यापक मोले सिंह एवं शासकीय प्राथमिक शाला भादावर के प्रधानाध्यापक किस्मत सिंह द्वारा शैक्षणिक कार्य के प्रति चरम सीमा की लापरवाही बरती जा रही है।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि दोनों प्रधानाध्यापक प्रतिदिन सुबह स्कूल पहुँचकर ई-अटेंडेंस (शिक्षक ऐप) के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और मात्र 5-10 मिनट बाद ही स्कूल छोड़कर अपने घर या अन्य कार्यों के लिए चले जाते हैं। इसके बाद शाम को स्कूल समय समाप्त होने पर वे किसी भी स्थान से ऐप खोलकर अपनी रवानगी (स्कूल छोड़ने की उपस्थिति) दर्ज कर देते हैं।
शिक्षक ऐप की खामी का ऐसे उठाया जा रहा फायदा
प्रदेश में शिक्षकों की हाजिरी 'शिक्षक ऐप' के जरिए लगाई जाती है। नियमानुसार, सुबह 9:30 से 10:30 बजे के बीच उपस्थिति दर्ज कराने के बाद शिक्षक को पूरे साढ़े पांच घंटे शाला में उपस्थित रहना अनिवार्य है।
सेंधमारी का तरीका:
शिक्षक सुबह स्कूल पहुंचकर उपस्थिति लगाते हैं और ऐप को बंद कर देते हैं। शाम को साढ़े पांच घंटे बाद शिक्षक चाहे किसी भी जगह पर हो, ऐप खोलकर रवानगी दर्ज कर दी जाती है। तकनीकी खामी के कारण रवानगी की लोकेशन भी फर्जी तरीके से मान्य हो जाती है। इसी का फायदा उठाकर शिक्षक पूरे दिन गायब रहने के बावजूद कागजों में 'उपस्थित' बने रहते हैं।
वेतन आहरण और नियमों की अनदेखी
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना ई-अटेंडेंस के वेतन का आहरण नहीं किया जाएगा। जिस तिथि को उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, उस दिन का वेतन काटने का नियम है। इसके लिए संकुल प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके, इन प्रधानाध्यापकों को न तो प्रशासनिक कार्रवाई का डर है और न ही कानून का खौफ। इन्हें केवल हर महीने मिलने वाले अपने नियमित वेतन से सरोकार है।
अधिकारियों का पक्ष:
"मामला संज्ञान में आया है, होगी सख्त कार्रवाई"
"शासकीय प्राथमिक शाला भादावर के दोनों प्रधानाध्यापकों द्वारा शैक्षणिक कार्यों में लापरवाही बरतने और ड्यूटी समय से गायब रहने की जानकारी मीडिया व स्थानीय माध्यमों से संज्ञान में आई है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। दोनों संबंधित प्रधानाध्यापकों को शोकॉज (कारण बताओ) नोटिस जारी कर नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
— एस. एम. सिंह, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), बड़वारा एवं संकुल प्राचार्य

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