भूमिपूजन की रफ्तार तेज़, धरातल पर काम सुस्त — क्या फिर छली गई कटनी की जनता?
कटनी | विशेष रिपोर्ट
पारंपरिक राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े दावों और वादों को दरकिनार कर जब कटनी की जनता ने ऐतिहासिक जनादेश देते हुए निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति संजीव सूरी को महापौर की कुर्सी सौंपी थी, तब पूरे शहर में एक नई उम्मीद जागी थी। दलीय राजनीति से ऊपर उठकर जनता ने इस विश्वास के साथ चाबी सौंपी थी कि अब कटनी के विकास को एक नई दिशा और तेज रफ्तार मिलेगी। हालांकि, वक्त बीतने के साथ जनता का वह भरोसा और विकास की उम्मीदें सुस्त प्रशासनिक चाल के आगे दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
शिलान्यास की होड़, धरातल पर सन्नाटा
शहर के अलग-अलग वार्डों और मुख्य चौराहों पर विकास कार्यों के 'भूमि पूजन' की झड़ी जिस तेजी से लगी, उससे लगा था कि कटनी की सूरत रातों-रात बदल जाएगी। रंग-बिरंगी पट्टिकाएं तो लग गईं, लेकिन उनके पीछे का काम कछुआ गति का शिकार हो गया। सच्चाई यह है कि यदि भूमि पूजन की आधी रफ्तार से भी धरातल पर निर्माण कार्य पूरे किए जाते, तो आज कटनी शहर की सड़कें, चौराहे और बुनियादी ढांचा चमकता हुआ दिखाई देता।
उम्मीदों के शहर में वही पुराना 'छलावा'
कटनी का नागरिक सालों से सिर्फ दावों का साक्षी बनता आया है। निर्दलीय महापौर के आने के बाद लगा था कि दलीय खींचातानी खत्म होगी और जनता के हित सर्वोपरि होंगे, लेकिन आज भी सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी है और स्वीकृत योजनाएं फाइलों से बाहर आने के लिए तरस रही हैं। नागरिक अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या इस बार भी उनके हाथ सिर्फ छलावा ही आया है?
सुलगते सवाल:
- निगरानी की कमी: जिन विकास कार्यों का भूमि पूजन हो चुका है, वे समय सीमा के भीतर क्यों पूरे नहीं हो पा रहे?
- इच्छाशक्ति का अभाव: क्या प्रशासनिक असहयोग और सुस्त कार्यप्रणाली ने शहर के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है?
कटनी की जनता ने बदलाव के लिए अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई थी। अब गेंद नगर सरकार के पाले में है कि वह शिलान्यासों के इस दौर से बाहर निकलकर धरातल पर काम दिखाए, ताकि कटनी की जनता को अपने फैसले पर मलाल न हो।


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