आरोपी आकाश लोधी की डिफॉल्ट बेल निरस्त: गवाहों को धमकाने और ₹75 लाख की पेशकश के बाद कोर्ट सख्त, 10 दिनों में सरेंडर करने का आदेशघ
कोर्ट में स्थिति साफ: CSP नेहा पच्चीसिया व पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद; पुलिस और आरोपी के बीच किसी तरह की मिलीभगत साबित नहीं
मुख्य बाते
- जमानत रद्द: गवाहों व फरियादी पक्ष को प्रभावित करने के कारण आरोपी आकाश उर्फ गोलू लोधी की जमानत निरस्त।
- ₹75 लाख का प्रस्ताव: कोर्ट ने माना कि फरियादी (मृतक की मां) को ₹75 लाख की पेशकश देना गवाहों को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास है।
- पुलिस को क्लीन चिट: संघर्षरत महिला अधिकारी CSP नेहा पच्चीसिया और पुलिस टीम पर लेन-देन के आरोप आधारहीन साबित।
- सरेंडर की समय-सीमा: कोर्ट ने आरोपी को 10 दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का दिया सख्त आदेश।
खबर विस्तार से
कटनी।
कुठला थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 271/2026 से जुड़े बेहद संवेदनशील और चर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, कटनी की अदालत से एक बड़ा फैसला सामने आया है। अदालत ने आरोपी आकाश उर्फ गोलू लोधी को पूर्व में मिली डिफॉल्ट बेल को निरस्त करते हुए उसे 10 दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) करने का आदेश दिया है।
गवाहों को धमकाने और ₹75 लाख की पेशकश का मामला
मामले में फरियादी कल्लू बाई (मृतक की माता) की ओर से अधिवक्ता कमलेश शुक्ला ने न्यायालय में आवेदन क्रमांक 10/2026 प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि जमानत का लाभ मिलने के बाद आरोपी और उसके साथियों द्वारा अभियोजन पक्ष के गवाहों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
आवेदन में यह तथ्य भी सामने लाया गया कि आरोपी पक्ष की ओर से फरियादी (मृतक की मां) को केस वापस लेने/प्रभावित करने के लिए ₹75 लाख देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि फरियादी पक्ष ने इस रकम को लेने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि ₹75 लाख की पेशकश किया जाना प्रमाणित होता है, जो कि जमानत की शर्तों का सीधा उल्लंघन और गवाहों को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास है।
CSP नेहा पच्चीसिया और पुलिसकर्मियों पर आरोप बेबुनियाद
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन और सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है:
- कोई मिलीभगत नहीं: माननीय न्यायालय के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पुलिस और आरोपी के बीच किसी भी प्रकार के लेन-देन या मिलीभगत का कोई आरोप या सबूत प्रमाणित नहीं होता है।
- भ्रामक आरोप: दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ निष्ठापूर्वक कर्तव्य निभा रही CSP नेहा पच्चीसिया पर लगाए गए लेन-देन के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद पाए गए।
- कोर्ट का निष्कर्ष: आरोपी द्वारा पुलिस, अभियोजन और अन्य पक्षों पर दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के आवेदन दिए गए थे, लेकिन पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वत लेने या आरोपी को अनुचित सहयोग देने की बात अदालत में साबित नहीं हुई।
अदालत की आगामी समय-सीमा
- 8 अगस्त 2026: विशेष न्यायालय द्वारा आदेश पारित कर डिफॉल्ट बेल निरस्त की गई।
- 10 दिवस के भीतर: आरोपी आकाश लोधी को कोर्ट में सरेंडर करना अनिवार्य।
- 14 अगस्त 2026: अभियोजन साक्ष्य के लिए तारीख निर्धारित।
- 18 अगस्त 2026: आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में सौंपने की प्रक्रिया।

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