मॉडल स्कूल के नाम पर 'मजाक': बच्चों के हाथ में गाइड, सिर पर बर्तन मांजने का बोझ
कैमोर के 'पीएम श्री' स्कूल से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली खबर; पढ़ाने की जगह बच्चों से ही ब्लैकबोर्ड लिखवा रहे शिक्षक, गुणवत्ताहीन भोजन और बर्तनों की धुलाई कराने का संगीन आरोप
विशेष संवाददाता | कैमोर/खलवारा बाजार (कटनी)
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम श्री' योजना, जिसका मकसद सरकारी स्कूलों को 'मॉडल' बनाकर आधुनिक शिक्षा प्रदान करना है—कटनी जिले के कैमोर (खलवारा बाजार) स्थित विद्यालय में दम तोड़ती नजर आ रही है। जिस स्कूल को क्षेत्र के लिए नजीर बनना था, वह आज शिक्षकों की घोर लापरवाही, अव्यवस्था और प्रशासनिक अनदेखी की बली चढ़ चुका है।
यहाँ बच्चों का भविष्य गढ़ने के बजाय उनके साथ मानसिक और शारीरिक खिलवाड़ किया जा रहा है। मामले का खुलासा तब हुआ जब बेबस छात्र-छात्राओं के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है।
शिक्षकों की 'हाई-टेक' कामचोरी: गाइड थमाई, खुद आराम फरमाया
स्कूल के विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्हें पढ़ाने के लिए जिम्मेदार शिक्षक अपनी मुख्य भूमिका से पूरी तरह भाग रहे हैं। कक्षाओं में शिक्षक खुद पढ़ाने या ब्लैकबोर्ड पर समझाने के बजाय बच्चों के हाथों में कुंजी (गाइड) थमा देते हैं।
- पढ़ाने की जगह 'कॉपी-पेस्ट' का खेल: एक छात्र को ब्लैकबोर्ड पर गाइड से देखकर लिखने को कहा जाता है, और बाकी पूरी क्लास उसे अपनी कॉपियों में उतारती रहती है।
- कटघरे में जिम्मेदार शिक्षक: छात्रों ने अंग्रेजी के शिक्षक राम नरेश प्रजापति, विज्ञान की शिक्षिका नीता बहेलिया, तथा हिंदी के शिक्षक मनदीप कौर व प्रमोद प्यासी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- गुणवत्ताहीन भोजन: बच्चों को बेहद निम्न स्तर का खाना परोसा जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
- बच्चों से बर्तन धुलवाने का गंभीर आरोप: खाना खाने के बाद मासूम बच्चों से उनके जूठे बर्तन धुलवाए जाते हैं। वायरल वीडियो में बच्चे खुद बर्तन धोते दिखाई दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर बाल अधिकारों और शासकीय नियमों का खुला उल्लंघन है।
- परिजनों का कहना है: "हम अपने बच्चों को भविष्य संवारने भेजते हैं, स्कूल के बर्तन मांजने या शिक्षकों की कामचोरी का शिकार होने नहीं। जो स्कूल मॉडल बनना चाहिए था, वह शोषण का केंद्र बन गया है।"
- मांग: अभिभावकों ने कटनी जिलाध्यक्ष और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।
"हमें सर-मैम खुद नहीं पढ़ाते। हाथ में गाइड देकर कहते हैं कि बोर्ड पर लिख दो और बाकी बच्चे उतार लें। जब हम सवाल पूछते हैं, तो सही जवाब नहीं मिलता।"
— पीड़ित छात्र/छात्रा (वायरल वीडियो के अनुसार)
शर्मनाक! पढ़ाई की जगह मांज रहे बर्तन, मिड-डे मील का बुरा हाल
अव्यवस्था का आलम केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। मध्याह्न भोजन (MDM) योजना में भी भारी धांधली और अमानवीय रवैया सामने आया है:
अभिभावकों का फूटा गुस्सा: दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
घटना की भनक लगते ही बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय ग्रामीण स्कूल परिसर पहुंचे और जमकर हंगामा किया।
बड़ा सवाल?
क्या यही है 'पीएम श्री' का मॉडल?
जो योजना करोड़ों रुपये के बजट से सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए लाई गई थी, क्या वह कटनी के जमीनी धरातल पर केवल कागजी बनकर रह जाएगी? अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इन गैर-जिम्मेदार शिक्षकों पर क्या एक्शन लेता है या मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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