कटनी: कैलवारा खुर्द में नवाचार के साथ मना स्वतंत्रता दिवस, 40 से अधिक बुजुर्गों का हुआ भव्य सम्मान
कटनी
कटनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द में इस बार 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ-साथ एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल के रूप में दर्ज हो गया। राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर जहां पूरे देश में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही, वहीं कैलवारा खुर्द पंचायत ने समाज के मार्गदर्शक यानी अपने बुजुर्गों को सम्मानित कर 15 अगस्त को यादगार बना दिया।
मुख्य अतिथि
मुख्य अतिथी के रूप मे मंच संचालन कर रहे भाजपा नेता और समाज सेवी विनोद बड़गैया और रिटायर्ड जनपद पंचायत कटनी मे पी सी ओ के पद पदस्थ रहे अशोक चक्रवर्ती मौजूद रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच छुटटू कोल की रही सहयोग मे मनीष गौतम,राजेश पाल,नरेंद्र दुबे ,चमन कोल, अनिल कोरी, नीरज पांडेय जनप्रतिनिधियो सहित और सचिव विष्णु लाल चक्रवर्ती मौजूद रहे
पंचायत के नेतृत्व की सराहनीय पहल
इस विशेष आयोजन का श्रेय ग्राम पंचायत सरपंच छुटटू कोल, सचिव विष्णु चक्रवर्ती और प्रमुख पंच नीरज पांडे को जाता है। तीनों के संयुक्त नवाचार और सोच ने गांव के राष्ट्रीय उत्सव को एक नया आयाम दिया। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि जिस स्वतंत्रता का जश्न हम आज मना रहे हैं, उसकी नींव में हमारे बुजुर्गों का आशीर्वाद और संघर्ष शामिल है, इसलिए इस ऐतिहासिक दिन पर उनका सम्मान करना सर्वोपरि है।
तिलक, मोतियों की माला और शॉल से किया वंदन
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पंचायत भवन परिसर में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें गांव के 40 से अधिक वयोवृद्धों को आमंत्रित कर मंच पर पूरे आदर-सत्कार के साथ सम्मानित किया गया।
- सम्मान की विधि: सभी बुजुर्गों का सबसे पहले रोली-अक्षत से तिलक लगाया गया।
- उपहार: उन्हें मोतियों की माला पहनाई गई, मुख मीठा कराया गया और अंगवस्त्र के रूप में शॉल भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया गया।
सम्मान पाकर कई बुजुर्गों की आंखें छलक आईं। उन्होंने पंचायत के इस कदम की दिल खोलकर सराहना की और पूरी पंचायत टीम को अपना भरपूर आशीर्वाद दिया।
क्षेत्रभर में हो रही प्रशंसा, प्रशासन से उठी मांग
कैलवारा खुर्द पंचायत का यह नवाचार केवल गांव तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में चर्चा और तारीफ का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि प्रशासन को इस पहल से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिला प्रशासन को ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को सभी पंचायतों में वृद्ध जनों के सम्मान का यह सिलसिला अनिवार्य रूप से चले। इससे न केवल राष्ट्रीय पर्वों की सार्थकता बढ़ेगी, बल्कि युवा पीढ़ी में भी अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संस्कारों का बीजारोपण होगा।







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