तहसीलों में पसरा सन्नाटा, कटनी समेत पूरे प्रदेश में पटवारी क्यों हैं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर?

 कटनी (म.प्र.)

​कटनी जिले की सभी तहसीलों में इन दिनों नामांतरण, सीमांकन, आय-जाति प्रमाण पत्र और गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य ठप पड़े हैं। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर कटनी सहित पूरे प्रदेश के लगभग 23 से 25 हजार पटवारी अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

​सरकार द्वारा बिना जांच सीधे FIR न दर्ज करने जैसे कुछ निर्देशों पर राहत देने के बावजूद पटवारी अपनी मुख्य मांगों पर अड़े हुए हैं।

​आखिर क्या हैं पटवारियों की प्रमुख मांगें?

​पटवारियों का कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से लगातार अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन देकर टालमटोल कर रही है:

  1. कैडर रिव्यू और पदोन्नति (Promotion):
    • मांग: सेवा अवधि के दौरान कम से कम तीन पदोन्नति या क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ मिले।
    • कारण: पटवारियों का कहना है कि वे जिस पद पर भर्ती होते हैं, वर्षों तक सेवा देने के बाद उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

  1. ग्रेड पे 4200 (लेवल-7 वेतनमान):
    • मांग: बढ़ते कार्यभार, शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी जिम्मेदारियों को देखते हुए उनका ग्रेड पे बढ़ाकर ₹4,200 (पे-लेवल 7) किया जाए।

  1. सुरक्षा और प्रोटेक्शन एक्ट:
    • मांग: राजस्व न्यायालयों में केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने पर पटवारियों के खिलाफ बिना किसी जांच के सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज न की जाए। (नोट: इस मांग पर सरकार ने प्राथमिक जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई का आदेश दिया है।)

  1. लंबित वित्तीय भुगतान व भत्ते:
    • मांग: पिछले लंबे समय से बकाया मानदेय, ऑनलाइन कार्य के संसाधन/भत्ते दिए जाएं तथा नए पटवारियों को शुरुआत से ही 100% वेतन का लाभ मिले।

  1. तकनीकी व ऐप संबंधी समस्याएं:
    • मांग: डिजिटल गिरदावरी और खसरा अपडेट करने वाले ऐप्स में आ रही व्यावहारिक और तकनीकी कमियों को दूर किया जाए।

​सरकार का रुख और वर्तमान स्थिति

​हाल ही में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने जिला कलेक्टर्स को निर्देश जारी किए हैं कि पटवारियों पर सीधे FIR न करके पहले विभागीय जांच की जाएगी। इसके अलावा नायब तहसीलदार परीक्षा और लंबित मानदेय पर फाइलें आगे बढ़ने की बात कही गई है।

लेकिन गतिरोध क्यों बना हुआ है?

पटवारी संघ का स्पष्ट कहना है कि जब तक कैडर रिव्यू, वेतनमान (ग्रेड पे ₹4,200) और पदोन्नति जैसी मुख्य मांगों पर कैबिनेट का ठोस निर्णय या लिखित आदेश नहीं आता, तब तक कलमबंद हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।

आम जनता और किसान परेशान:

हड़ताल के कारण कटनी जिले की तहसीलों में फाइलों का अंबार लग गया है। नामांतरण, बंटवारा, पीएम किसान सम्मान निधि सत्यापन और कृषि ऋण संबंधी कार्य रुकने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


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