जैव विविधता संरक्षण, PBR के अद्यतन और लाभ-प्रभाग राशि के उपयोग पर दिया गया विशेष मार्गदर्शन
कटनी। सामान्य वन मंडल कटनी द्वारा आज जिले की 117 जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) के अध्यक्षों एवं सचिवों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर समितियों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाकर जनभागीदारी के जरिए जैव विविधता संरक्षण को मजबूती प्रदान करना था।
जनभागीदारी ही संरक्षण की आधारशिला: डीएफओ
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए वनमंडल अधिकारी (DFO) श्री गर्वित गंगवार ने कहा कि जैव विविधता प्रबंधन समितियां स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की मूल आधारशिला हैं। इनके माध्यम से गांव के स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण, संवर्धन और सदियों पुराने पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण बेहद प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण सत्र में मध्यप्रदेश जैव विविधता बोर्ड, भोपाल से आए तकनीकी विशेषज्ञ श्री विवेक पाण्डेय एवं श्री शुभम सिंह ने मुख्य वक्ताओं के रूप में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने:
- जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका और दायित्वों को रेखांकित किया।
- लोक जैव विविधता पंजी (PBR) को अद्यतन (Update) करने की प्रक्रिया समझाई।
- स्थानीय जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के तरीके बताए।
- लाभ-प्रभाग (Benefit Sharing) राशि के नियमानुसार पारदर्शी उपयोग एवं प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।
अधिकारियों का मिला मार्गदर्शन
इस दौरान उप वनमंडल अधिकारी (पश्चिम कटनी) श्री कार्तिकेय भट्ट, उप वनमंडल अधिकारी (पूर्व कटनी) श्री जगदीश वास्पे तथा कटनी पीबीआर नोडल अधिकारी श्री मोहनदास नागवानी ने भी उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित किया। अधिकारियों ने समितियों की कार्यप्रणाली को सुगम बनाने और ग्राम स्तर पर संरक्षण प्रयासों को एक जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यशाला में कटनी जिले की 117 समितियों के अध्यक्षों और सचिवों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न व्यावहारिक विषयों पर चर्चा की और अपने-अपने क्षेत्रों में लोक जैव विविधता पंजी के प्रभावी क्रियान्वयन और प्राकृतिक संपदा की रक्षा का संकल्प लिया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय जैविक संसाधनों के संवर्धन, समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और जनसहभागिता आधारित संरक्षण को एक नई दिशा देने में बेहद अहम साबित होगा।


Comments
Post a Comment