सुधार न्यास की नियम विरुद्ध बेची गई जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक9
मामला बरगवां स्थित योजना क्रमांक 17 का कटनी।
जबलपुर रोड स्थित बरगवां में सुधार न्यास की जमीन के अवैध क्रय-विक्रय के मामले में जांच समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने और आगे की वैधानिक कार्रवाई के निर्देश निगमायुक्त को जारी किए हैं। इस फैसले के बाद जमीन का सौदा करने वाले भू-माफियाओं और खरीदारों में हड़कंप मच गया है।
फर्जी शपथ पत्र के सहारे हुआ जमीनों का खेल
शासन द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी इस जमीन को मूल जमीन मालिकों ने निजी संपत्ति बताते हुए रजिस्ट्री कार्यालय में झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया। नियम-कायदों को ताक पर रखकर शहर के कई लोगों को यह जमीन बेच दी गई। खरीददारों ने न सिर्फ जमीन खरीदी, बल्कि उस पर निर्माण कार्य भी करा लिया। शिकायतों के बाद जब चार सदस्यीय जांच टीम ने पड़ताल की, तब भ्रामक जानकारी देकर की गई इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
1991 से चला आ रहा है विवाद
- वर्ष 1991: तत्कालीन नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष ने बरगवां योजना क्रमांक 17 के तहत आने वाली लगभग 3.45 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया था।
- वर्ष 1993: यह मामला जबलपुर कलेक्टर के पास पहुँचा, जिन्होंने 1991 में जारी किए गए अधिग्रहण मुक्ति के आदेश को निरस्त कर दिया।
- अदालती प्रक्रिया: मामला न्यायालय में पहुँचने पर 1993 के आदेश को यथास्थिति रखने तथा बाद में इस पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया गया था।
- विलय: कालांतर में नगर सुधार न्यास का विलय नगर निगम में हो गया, जिससे इसका मालिकाना हक नगर निगम के अधीन आ गया।
- प्रशासन का रुख
"अधिग्रहित जमीन के मामले में शिकायत मिली थी, जिसकी जांच चार सदस्यीय टीम से कराई गई। जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि नियम विरुद्ध और भ्रामक जानकारी देकर जमीन का विक्रय किया गया है। आगामी कार्रवाई के लिए नगर निगम को लिखा गया है।"
(कलेक्टर कटनी)

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