माधव नगर कैंप में अवैध पैकारियों और आहातों का जाल: जिला प्रशासन व आबकारी विभाग के मौन पर उठते सवाल
विशेष रिपोर्ट | कटनी
माधव नगर कैंप—एक ऐसा क्षेत्र जो अपनी घनी आबादी, व्यापारिक हलचल और दिन-रात की चहल-पहल के लिए जाना जाता है। लेकिन आज यह व्यस्तम व्यापारिक क्षेत्र अवैध शराब की पैकारियों, नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे आहातों और खुलेआम हो रही गैर-कानूनी गतिविधियों का गढ़ बनता जा रहा है।
बाजार के ऐन बीचों-बीच इस तरह के अवैध धंधों का निर्बाध संचालन न केवल स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन चुका है, बल्कि यह जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।
1. व्यस्ततम बाजार में शराब दुकान: किसकी शह पर बनी नीति?
स्थानीय निवासियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक बेहद व्यस्त, संकरे और रिहाइशी व व्यावसायिक क्षेत्र में शराब दुकान का लाइसेंस किस आधार पर जारी किया गया?
- सुरक्षा और शांति पर खतरा: जिस जगह रोजाना सैकड़ों लोगों, महिलाओं और बच्चों आवाजाही होती है, वहाँ शराब दुकान की मौजूदगी से आए दिन असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
- यातायात व्यवस्था ध्वस्त: दुकान के आसपास बेतरतीब खड़े वाहन और शराबियों के जमघट के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।
2. 'एक दुकान' की आड़ में दर्जनों अवैध पैकारियाँ
लाइसेंस तो केवल एक दुकान का है, लेकिन हकीकत यह है कि माधव नगर कैंप के कोने-कोने में अवैध पैकारियाँ (शराब के अवैध ब्रिकी केंद्र) फल-फूल रही हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है: "दुकान बंद होने के बाद भी देर रात तक गलियों में ऊंचे दामों पर शराब बेची जाती है। आहाते के नाम पर खुलेआम अवैध अड़्डे संचालित हो रहे हैं, जहाँ देर रात तक हंगामा और गाली-गलौज आम बात हो चुकी है।"
3. जिला प्रशासन के लिए चुनौती या अनदेखी?
इतने व्यस्त क्षेत्र में खुलेआम अवैध पैकारियाँ चलाना निश्चित रूप से कानून-व्यवस्था के लिए एक खुली चुनौती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन सचमुच इस स्थिति से बेखबर है, या फिर यह सब 'मौन सहमति' का नतीजा है?
- स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की चुप्पी: जब भी रहवासी इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें महज औपचारिक कार्रवाई का आश्वासन मिलता है। जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
- कानून-व्यवस्था पर असर: रिहाइशी इलाके में अवैध शराब बिक्री के कारण छेड़छाड़, विवाद और मारपीट की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे क्षेत्र के व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
जनता के तीखे सवाल:
- आबकारी विभाग से: क्या घनी आबादी और व्यावसायिक केंद्र के बीच शराब दुकान का संचालन नियमों के अनुकूल है?
- जिला प्रशासन से: माधव नगर कैंप की गलियों में चल रही अवैध पैकारियों पर सख्त बुलडोजर या कानूनी कार्रवाई कब होगी?
- पुलिस प्रशासन से: देर रात तक आहातों और पैकारियों में जुटने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने में देरी क्यों?
निष्कर्ष
माधव नगर कैंप में पनप रहा यह अवैध तंत्र केवल आबकारी नीति की विफलता नहीं है, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार पर भी हमला है। यदि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग ने जल्द ही इन अवैध पैकारियों को बंद कराकर सख्त कदम नहीं उठाए, तो स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का आक्रोश एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

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