कटनी RTO का 'रिमोट कंट्रोल' बाहरी हाथों में? कौन है ये मंटू भाईजान उर्फ मृदुल खान, जिस पर आरटीओ साहब हैं मेहरबान!

विशेष संवाददाता, कटनी

क्या कटनी का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) आधिकारिक तंत्र के बजाय बाहरी "मैनेजर्स" के दम पर चल रहा है? यह सवाल इन दिनों विभाग के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। इस बात को आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह सेंगर ने भी प्रमुखता से उठाया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है विश्वसनीय सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, रीवा से आकर कटनी RTO में अपने पैर जमा चुके एक शख्स—मंटू भाईजान उर्फ मृदुल खान—का दखल इस कदर बढ़ चुका है कि अब इसे 'समानांतर व्यवस्था' कहा जाने लगा है।

रीवा से कटनी तक का सफर और 'मैनेजमेंट' का जिम्मा

​सूत्रों का दावा है कि मंटू खान उर्फ मृदुल खान काफी लंबे समय से रीवा से कटनी आरटीओ कार्यालय में सक्रिय हैं। दफ्तर के भीतर और बाहर होने वाले समस्त प्रकार के "मैनेजमेंट" और सेटिंग्स का पूरा जिम्मा कथित तौर पर इन्हीं के कंधों पर है। चाहे विभिन्न विभागों से तालमेल बिठाना हो या कार्यालय के आंतरिक समीकरणों को संभालना, हर जगह इसी नाम की गूंज सुनाई देती है।

संतोष पाल की मेहरबानी... या परंपरा का हिस्सा?

​सबसे बड़ा सवाल वर्तमान आरटीओ संतोष पाल की मंटू खान पर विशेष मेहरबानी को लेकर उठ रहा है। चर्चा है कि मंटू खान हर वक्त आरटीओ संतोष पाल के साथ साए की तरह मौजूद रहते हैं। लेकिन बात सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं है; सूत्रों की मानें तो संतोष पाल से पहले जो भी अधिकारी यहाँ तैनात रहे, उनकी मेहरबानी भी मंटू भाईजान पर बराबर बनी हुई थी। आखिर इस 'परमानेंट मैनेजर' में ऐसा क्या हुनर है कि अधिकारी बदलते हैं, लेकिन इनका रसूख नहीं बदलता?

बाहरी लोगों के भरोसे कटनी RTO?

​कार्यालय के भीतर की गतिविधियों को करीब से देखने वालों का कहना है कि अगर इस स्थिति को "कटनी आरटीओ को बाहर के लोग चला रहे हैं" कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक सरकारी दफ्तर में, जहाँ आम जनता अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए कतारों में खड़ी रहती है, वहाँ एक बाहरी व्यक्ति की इतनी मजबूत भूमिका और हर वक्त की मौजूदगी कई गंभीर संदेह पैदा करती है।

मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं:

  • ​एक गैर-सरकारी और बाहरी व्यक्ति आरटीओ कार्यालय की मुख्य भूमिकाओं और फैसलों में हर वक्त कैसे शामिल रह सकता है?
  • ​सभी विभागों की कथित 'सेटिंग' और 'मैनेजमेंट' के पीछे की कड़ियाँ कहाँ तक जुड़ी हैं?
  • ​क्या उच्च अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम से अनजान हैं, या जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं?

​इस पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की है आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह सेंगर ने  आखिर मंटू भाईजान की वास्तविक भूमिका क्या है और आरटीओ दफ्तर में उनकी इस बेरोकटोक मौजूदगी का राज क्या है, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।


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