बड़वारा सहकारी समिति की गुप्त भर्ती पर उठे सवाल, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप
सहकारी समिति की भर्ती पर सवालों का तूफान!
साहब! जिले के कलेक्टर अनजान या फिर बेबस?
रिश्तेदारी के दम पर मिली नौकरी? भाई-भतीजावाद अपनाते हुए सेल्समैनों की नियुक्ति पर बवाल!
- प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित बड़वारा की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
- RTI के बाद भी नहीं मिली जानकारी
- निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्यवाही की मांग
कटनी
कटनी जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित बड़वारा में हाल ही में हुई भर्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया तथा रिश्तेदारी और प्रभाव के आधार पर नियुक्तियां किए जाने की आशंका है। (इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।)
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि इन नियुक्तियों में निर्धारित नियमों, विज्ञापन, चयन प्रक्रिया और मेरिट का पालन नहीं किया गया, तो इससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं तथा सहकारी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
मामले से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) के तहत भर्ती प्रक्रिया, विज्ञापन, चयन सूची, नियुक्ति आदेश तथा चयन समिति की कार्यवाही की प्रतियां मांगी गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संदेह और गहरा हुआ है। हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
जिन नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं:
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सर्वेश राय (भतीजा)
- पद: सेल्समैन (रोहनिया)
- रिश्तेदारी: रामेश्वर राय (चाचा) से बताई गई।
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अभिषेक रघुवंशी (भांजा)
- पद: प्रबंधक (बड़वारा)
- रिश्तेदारी: देवानंद रघुवंशी (मामा) से बताई गई।
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प्रतीक पांडेय
- पद: मर्यादित साख मैनेजर (बड़वारा)
- रिश्तेदारी: पंकज त्रिपाठी से बताई गई।
शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांगें:
- पारदर्शी जांच: पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की जाए।
- नियुक्तियों पर रोक: जांच पूरी होने तक विवादित नियुक्तियों पर आवश्यक निर्णय लिया जाए।
- RTI की जानकारी: RTI के तहत मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
- कठोर कार्यवाही: यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाए।
संबंधित कानूनी प्रावधान / धाराएं:
- सहकारी अधिनियम, 1960 की धारा 57, 58
- म.प्र. सहकारी समितियां कर्मचारी सेवा नियम, 1974
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1), 7(1)
- भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा: 120B, 409, 420, 467, 468, 471 (यदि धोखाधड़ी/कूटरचना सिद्ध होती है)
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (यदि लाभ के लिए पद का दुरुपयोग सिद्ध होता है)
ग्रामीणों में आक्रोश:
ग्रामीणों का कहना है कि "सरकारी नौकरी कोई निजी जागीर नहीं है। योग्य युवाओं का हक मारकर रिश्तेदारों को लाभ देना सीधा-सीधा अन्याय और नियमों की हत्या है। दोषियों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।"
अब देखना यह होगा...
क्या जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करेगा?

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