विशेष रिपोर्ट: मध्याह्न भोजन में धांधली और राशन की कालाबाजारी, बीआरसी की कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थान: कटनी (मध्य प्रदेश)
कटनी। जिले की कई ग्राम पंचायतों में संचालित स्व-सहायता समूहों के माध्यम से सरकारी योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्कूलों में नौनिहालों के लिए आने वाले मध्याह्न भोजन (MDM) के राशन में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर उसे खुले बाजार में बेचे जाने का गंभीर मामला सामने आया है।
किचन शेड खाली, समूह संचालकों के घरों में सरकारी गल्ले का 'अवैध' स्टोर
नियमों के मुताबिक मध्याह्न भोजन का राशन और किराना सामग्री स्कूल परिसर स्थित किचन शेड या निर्धारित स्थान पर रखी जानी चाहिए। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
आरोप है कि स्व-सहायता समूह के संचालक या उनका संचालन करने वाले प्रभावशाली व्यक्ति पूरे राशन और किराने के सामान को अपने निजी घरों में अवैध रूप से स्टोर करके रखते हैं। 'ऑन डिमांड' व्यवस्था के नाम पर रोजाना महज नाममात्र का सामान—जैसे एक पाव तेल, थोड़ा सा आटा या चावल और किराना—खाना बनाने के लिए भेजा जाता है। इस व्यवस्था के कारण बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार में भारी कटौती हो रही है और बचा हुआ सरकारी राशन बाजार में खपाया जा रहा है।
बीआरसी मनोज गौतम की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में कटनी में वर्तमान में पदस्थ बीआरसी (BRC) मनोज गौतम की कार्यप्रणाली और भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों और जागरूक ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में बीआरसी से लिखित और मौखिक शिकायतें भी कीं।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि शिकायत के बावजूद आज दिनांक तक बीआरसी द्वारा किसी भी प्रभावित ग्राम पंचायत या स्कूल का औचक निरीक्षण (दौरा) नहीं किया गया। अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी और निष्क्रियता से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इस भ्रष्टाचार को मौन संरक्षण प्राप्त है?
जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
मध्याह्न भोजन योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बचाना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन देना है। लेकिन कटनी जिले के कई क्षेत्रों में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है।
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर कटनी एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि:
- बीआरसी मनोज गौतम की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
- सभी स्व-सहायता समूहों के राशन स्टॉक का तुरंत भौतिक सत्यापन कराया जाए।
- राशन को निजी घरों में रखने वाले समूह संचालकों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

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