दिनांक: 14 जुलाई 2026
लाडली बहना पोर्टल पर 'ताला': क्या 'मामा' के जाते ही सौतेली हो गईं प्रदेश की लाखों बहनें?
मोहन सरकार के मौन पर उठ रहे सवाल; अपात्र से पात्र हुईं और 21 साल की नई विवाहित बहनें पूछ रहीं- 'आखिर हमारा क्या कसूर?'
विशेष प्रतिनिधि
मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का चेहरा बनी 'लाडली बहना योजना' को लेकर अब प्रदेश की सड़कों से लेकर चौपालों तक आक्रोश की लहर है। योजना शुरू हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन महीनों से बंद पड़ा लाडली बहना पोर्टल दोबारा खुलने का नाम नहीं ले रहा है।
लाखों की संख्या में ऐसी बहनें हैं जो पहले तकनीकी कारणों, आयु सीमा (जैसे अब 21 वर्ष की हो चुकी विवाहित युवतियां) या दस्तावेज पूरे न होने के कारण फॉर्म नहीं भर पाई थीं। वे हर दिन इस उम्मीद में कंप्यूटर सेंटरों के चक्कर काटती हैं कि आज नहीं तो कल पोर्टल खुलेगा, लेकिन हर बार उन्हें मायूसी ही हाथ लगती है।
'मामा' के राज में जो न्याय था, क्या 'मोहन' राज में वह 'सौतेला व्यवहार' बन गया?
बहनों के बीच सबसे बड़ा दर्द इस बात का है कि सरकार बदलने के बाद उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं दिख रहा।
"जब शिवराज सिंह चौहान 'मामा' बनकर मंच से कहते थे कि 'मेरी कोई भी बहन बिना लाभ के नहीं रहेगी', तो हमें भरोसा था। आज हमारे मामा दिल्ली चले गए, तो क्या प्रदेश की नई मोहन सरकार ने हमें भुला दिया? कुछ बहनों के खातों में हर महीने पैसे आ रहे हैं, तो बाकी योग्य बहनों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?"
— संगीता बाई (उम्र 22 वर्ष), कटनी
यह सवाल आज सिर्फ संगीता का नहीं, बल्कि प्रदेश की उन लाखों महिलाओं का है जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही हैं और पात्रता की सभी शर्तें पूरी करती हैं।
पोर्टल बंद होने से किन बहनों को हो रहा है नुकसान?
पोर्टल न खुलने से मुख्य रूप से तीन श्रेणियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं:
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प्रभावित वर्ग |
कारण |
स्थिति |
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नई विवाहित बहनें |
जिनकी शादी हाल ही में हुई है और उम्र 21 वर्ष से अधिक है। |
फॉर्म जमा करने का कोई जरिया नहीं। |
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उम्र का दायरा पार करने वालीं |
जो पूर्व में 21 वर्ष की नहीं थीं, लेकिन अब पात्रता सीमा में आ चुकी हैं। |
पोर्टल बंद होने से अपात्र बनी हुई हैं। |
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सुधार की इच्छुक बहनें |
जिनके आधार या बैंक डीबीटी (DBT) में त्रुटि थी और वे उसे ठीक करवा चुकी हैं। |
फॉर्म री-सबमिट नहीं कर पा रही हैं। |
क्या कभी दोबारा खुल पाएगा लाडली बहना पोर्टल?
सूत्रों और प्रशासनिक गलियारों की मानें तो सरकार वर्तमान में योजना के बढ़ते वित्तीय बोझ (Financial Burden) को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। हर महीने करोड़ों रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर करने से सरकारी खजाने पर भारी दबाव है। यही कारण है कि मोहन सरकार नए रजिस्ट्रेशन खोलने से कतरा रही है।
हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। महिला संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही पोर्टल खोलकर छूटी हुई बहनों को मौका नहीं दिया, तो यह प्रदेश की आधी आबादी के साथ बड़ा विश्वासघात होगा।
हमारा नजरिया
योजनाएं केवल वोट पाने का जरिया नहीं होनी चाहिए। अगर 'लाडली बहना' योजना प्रदेश की महिलाओं की जिंदगी बदलने के लिए है, तो इसका लाभ हर उस पात्र महिला को मिलना चाहिए जो इसकी हकदार है। सरकार को जल्द से जल्द पोर्टल खोलकर अपनी नीयत साफ करनी चाहिए, ताकि बहनों का यह विश्वास बना रहे कि वे वाकई 'लाडली' हैं, 'सौतेली' नहीं।

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