कटनी जिले मे डल रही सीवर लाइन बनी जिलेवासियो के लिये सिरदर्द सीवर लाइन मे हो रहे गुणवत्ता हीन  कार्य खडे कर रहे कई गंभीर सवाल 

कटनी। (विशेष रिपोर्ट)

​शहर के सुनहरे भविष्य और ‘विकास’ के नाम पर बिछाई जा रही नगर निगम की सीवर लाइन आज शहरवासियों के लिए सबसे बड़ी आफत बन चुकी है। प्रशासनिक दावों की मानें तो सीवर लाइन से शहर का कायाकल्प हो रहा है, लेकिन धरातल पर एक आम नागरिक की जिंदगी हिचकोलों और धूल-मिट्टी के बीच सिमट कर रह गई है।

​कागजों पर विकास, सड़कों पर गड्ढे

​नगर निगम की कार्यप्रणाली पर यदि एक आम आदमी की नजर से देखा जाए, तो पूरी परियोजना में लापरवाही और गुणवत्ताहीनता की परतें साफ उधड़ती नजर आ रही हैं।

  • आकार पर सवाल: जल निकासी की दीर्घकालिक जरूरतों को दरकिनार कर ऐसे छोटे पाइप डाले जा रहे हैं जो भविष्य में मामूली बारिश का दबाव भी नहीं झेल पाएंगे।
  • भ्रष्टाचार की 'डस्ट-रेत' कोटिंग: सबसे गंभीर मामला सीवर लाइन खोदने के बाद गड्ढों को बंद करने की प्रक्रिया में सामने आ रहा है। पाइप डालने के बाद सड़कों की प्रॉपर बेस-पैकिंग और कंक्रीट मरम्मत करने के बजाय, ठेकेदार केवल डस्ट (धूल) और रेत का हल्का मिश्रण डालकर खानापूर्ति कर रहे हैं।

​24 घंटे में धंस रही हैं सड़कें

​गुणवत्ताहीन कार्य का आलम यह है कि जिस गड्ढे को आज डस्ट और रेत से ढका जाता है, अगले ही दिन गाड़ियों की आवाजाही या हलकी सी नमी से वही जगह धंस कर जानलेवा गड्ढे में तब्दील हो जाती है। यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि गुणवत्ता नियमों की सरेआम अनदेखी का प्रमाण है।

बड़ा सवाल: जब सीवर लाइन का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं हो रहा, तो ठेकेदारों के काम की जांच करने वाले जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?


​जनता की जुबानी: 'विकास' या स्थाई सिरदर्द?

​स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि सीवर लाइन निर्माण के बाद सड़कों की हालत ऐसी कर दी गई है कि पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। उड़ती धूल से लोग सांस की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, तो वहीं धंसी हुई सड़कों के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

​यह बात अब पूरी तरह तय हो चुकी है कि नगर निगम का यह 'विकास मॉडल' फिलहाल पूरे कटनी जिले के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

​जिला प्रशासन और महापौर से सीधे सवाल

  1. मानकों की अनदेखी क्यों? गड्ढों को ढकने में डस्ट और रेत का इस्तेमाल करने की इजाजत किस नियम के तहत दी गई?
  2. थर्ड-पार्टी ऑडिट कब? क्या नगर निगम इस गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराएगा?
  3. जनता के पैसों का हिसाब: जनता के टैक्स के पैसों से बन रही इस योजना में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का जिम्मेदार कौन है?

​नगर निगम को यह समझना होगा कि विकास की नींव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर काम की मजबूती और जन-सुविधा से तय होती है। यदि समय रहते इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया, तो कटनी की जनता का यह आक्रोश आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।


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