जनता बेहाल, अफसरशाही निहाल: कटनी पीडब्ल्यूडी विभाग सुप्त अवस्था में, जनसुनवाई सिर्फ कागजों पर!

विशेष संवाददाता, कटनी

जिस लोकतंत्र में जनता को जनार्दन माना गया है, उसी लोकतंत्र में जब जनता के सेवक ही 'साहब' बनकर बैठ जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों कटनी जिले के लोक निर्माण विभाग (PWD) में देखने को मिल रहा है। विभाग पूरी तरह से सुप्त अवस्था में चला गया है, जहां बैठे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है।

​अधिकारियों के पास वातानुकूलित कमरों में बैठने का समय तो है, लेकिन दूर-दराज से अपनी फरियाद लेकर आने वाले नागरिकों से मिलने की फुर्सत नहीं है।

आधे घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिलीं 'मैडम'  इंजीनियर साहब का फोन लगातार नही उठा

​अधिकारियों की इस तानाशाही और संवेदनहीनता का ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब शारदा सिंह नामक जागरूक नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर विभाग के चक्कर काट रहे थे।

  • ई  मेडम ​शारदा सिंह  का आधे घंटे का इंतजार: वे अधिकारी से मिलने के लिए कार्यालय के बाहर आधे घंटे से अधिक समय तक इंतजार करते रहे, लेकिन अधिकारी महोदया ने उनसे मिलना तक उचित नहीं समझा।
  • इंजीनियर बत्रा की बेरुखी: विभाग के इंजीनियर बत्रा का रवैया भी कुछ कम निराशाजनक नहीं है। उन्हें जनता और पीड़ितों द्वारा कई बार फोन लगाया गया, लेकिन साहब का फोन उठाना तो दूर, उन्होंने वापस कॉल करने की जहमत तक नहीं उठाई।
  • बड़ा सवाल: आखिर इन अधिकारियों को किस बात का गुरूर है? जनता के टैक्स से वेतन पाने वाले ये नुमाइंदे जनता को ही ठेंगा दिखाने पर क्यों उतारू हैं?


    यह कैसा लोकतंत्र?

    ​यह कैसी लोकतांत्रिक व्यवस्था है जहां एक आम नागरिक को अपनी वाजिब बात रखने के लिए भी गिड़गिड़ाना पड़ रहा है? पीडब्ल्यूडी विभाग आखिर अपने मूल दायित्वों से कैसे भाग सकता है? जिले की सड़कें और बुनियादी ढांचा जहां दम तोड़ रहा है, वहीं विभाग के जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। फोन न उठाना और कार्यालय में मौजूद रहकर भी न मिलना, सीधे तौर पर आम जनता के अधिकारों का हनन है।

    वरिष्ठ अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग

    ​कटनी पीडब्ल्यूडी की इस कार्यप्रणाली से आम जनता में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन और विभाग के उच्च अधिकारी इन गैर-जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या कलेक्टर महोदय इस तानाशाही का संज्ञान लेंगे, या फिर कटनी की जनता इसी तरह बंद कमरों के बाहर इंतजार करने को मजबूर रहेगी?


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