कटनी परिवहन विभाग में 'जय और वीरू' की समानांतर सरकार; रूरल क्षेत्रों में सरेआम वसूली के लग रहे गंभीर आरोप, संपत्ति की जांच की मांग 

कटनी। भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बातें करने वाले परिवहन विभाग की नाक के नीचे कटनी जिले में एक बड़ा खेल चल रहा है। सूत्रों के हवाले से—और वो भी बेहद विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से—यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है कि कटनी आरटीओ (RTO) संतोष पाल के कथित संरक्षण में 'जय और वीरू' नामक दो प्राइवेट कर्मचारी ग्रामीण और रूरल क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इन दोनों का मुख्य काम सड़कों पर दौड़ने वाली ओवरलोडिंग गाड़ियों से सरेआम अवैध वसूली करना बताया जा रहा है।

​लगातार मीडिया संस्थानों द्वारा इस खबर को प्रमुखता से चलाया जा रहा है, जिससे कटनी आरटीओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कौन हैं ये 'जय और वीरू'?

​फिल्मी किरदारों जैसे लगने वाले ये नाम असल में कटनी परिवहन विभाग के समानांतर अपनी 'अवैध हुकूमत' चला रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों की मानें तो:

  • निजी तौर पर तैनात: ये सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह प्राइवेट व्यक्ति हैं।
  • वसूली का जिम्मा: इन्हें कथित तौर पर केवल और केवल रूरल क्षेत्रों में ओवरलोड वाहनों से एंट्री और अवैध वसूली का 'टास्क' सौंपा गया है।
  • विभाग की चुप्पी: सरकारी दफ्तर और चेकिंग पॉइंट्स पर इन बाहरी लोगों की धौंस इस कदर है कि आम वाहन चालक इनके आगे बेबस हैं।

दिन दोगुनी, रात चौगुनी बढ़ रही संपत्ति

​चर्चाओं का बाजार गर्म है कि महज कुछ समय में ही इन दोनों प्राइवेट किरदारों की माली हालत में चमत्कारी बदलाव आया है। बिना किसी वैध बड़े व्यवसाय या पुश्तैनी संपत्ति के, इनकी संपत्ति दिन दोगुनी और रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।

बड़ा सवाल: आखिर ऐसा कौन सा अलादीन का चिराग इन प्राइवेट कर्मचारियों के हाथ लग गया है, जिससे ये चंद दिनों में ही फर्श से अर्श पर पहुंच गए? क्या इस काली कमाई का हिस्सा ऊपर तक भी जा रहा है?


प्रशासन और मंत्रालय से सख्त कार्रवाई की मांग

​इस गंभीर मामले के उजागर होने के बाद अब गेंद जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और परिवहन मंत्रालय के पाले में है। जनहित और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित कदम तत्काल उठाए जाने की मांग की जा रही है:

  1. तत्काल निष्कासन: तथाकथित 'जय और वीरू' नामक इन दोनों प्राइवेट व्यक्तियों को आरटीओ के कामकाज और चेकिंग गतिविधियों से तुरंत दूर किया जाए।
  2. निष्पक्ष जांच: कटनी आरटीओ संतोष पाल की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो कि आखिर किसके शह पर प्राइवेट लोग विभाग को संचालित कर रहे हैं।
  3. संपत्ति की जांच: इन दोनों संदिग्ध प्राइवेट व्यक्तियों की संपत्तियों की बारीकी से जांच की जाए ताकि अवैध वसूली के साम्राज्य का पर्दाफाश हो सके।

​अगर समय रहते इस 'जय-वीरू' की जोड़ी और उनके संरक्षकों पर नकेल नहीं कसी गई, तो परिवहन विभाग की बची-कुची साख भी पूरी तरह से जमींदोज हो जाएगी। देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रशासन इस खुली लूट पर कब संज्ञान लेते हैं।

 नोट-यह खबर पूर्णतः विश्वसनीय सूत्रो के हवाले से मिली जानकारी पर आधारित है 


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