कटनी PHE विभाग की संदेहास्पद कार्यप्रणाली: आराम फरमा रहे अधिकारी, परेशान हो रहे जनप्रतिनिधि!

 कैलवारा खुर्द कटनी में टंकी बनकर तैयार, पर बोर के नाम पर अधिकारी 4 महीने से दे रहे सिर्फ 'तारीख पर तारीख'

कटनी। सरकार हर घर जल पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन कटनी के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण धरातल पर स्थितियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। विभाग की संदेहास्पद कार्यप्रणाली का एक बड़ा उदाहरण कैलवारा खुर्द में देखने को मिल रहा है, जहां पानी की टंकी बनने से पहले शुरू हुआ बोरिंग का काम आज तक अधूरा पड़ा है। हालत यह है कि टंकी बनकर लगभग तैयार होने को है, लेकिन उसमें भरने के लिए पानी का स्रोत (बोर) ही गायब है।

एसडीओ का एक ही बहाना— 'मशीन नहीं है'

​स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी इस समस्या को लेकर विभाग के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) साकेत सुहाने से बात की जाती है, तो उनके पास केवल एक ही रटा-रटाया जवाब होता है। SDO सुहाने "एक हफ्ते में काम हो जाएगा" का भरोसा देते-देते लगभग तीन से चार महीने का समय बिता चुके हैं। जब भी काम टालने की वजह पूछी जाती है, तो विभाग का बहाना होता है कि "मशीन उपलब्ध नहीं है।"

​अब जनता यह सवाल पूछ रही है कि:

  • ​क्या करोड़ों का बजट संभालने वाले पीएचई विभाग के बस में एक बोर कराना भी नहीं रह गया है?
  • ​क्या ऐसे ही बहानों के सहारे जनता से जुड़े जरूरी कार्यों को महीनों तक टाला जाता रहेगा?

लोकल पोस्टिंग का मिल रहा 'फायदा'?

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कटनी पीएचई में पदस्थ एसडीओ साकेत सुहाने कटनी के ही स्थानीय निवासी हैं, जिनका गृह क्षेत्र आजाद चौक  बताया जा रहा है। इस जानकारी के सामने आने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।

​सवाल यह उठ रहा है कि क्या गृह जिला या लोकल पोस्टिंग होने का असर अधिकारी की कार्यशैली पर पड़ रहा है? अक्सर देखा गया है कि अधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र या लोकल में पोस्टिंग देने से काम में वह गंभीरता और जवाबदेही नजर नहीं आती जो होनी चाहिए। क्या इसी वजह से जनता की समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को विभाग इतनी बेफिक्री से नजरअंदाज कर रहा है?

जनता बेहाल, जवाबदेह बेखबर

​टंकी का ढांचा खड़ा हो जाने के बाद भी पानी की एक बूंद के लिए तरसते ग्रामीण आज भी अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आराम फरमाते अधिकारी और चक्कर काटते जनप्रतिनिधि, कटनी पीएचई विभाग की इसी तस्वीर ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन क्या संज्ञान लेता है, या फिर कैलवारा खुर्द के लोग इसी तरह 'मशीन आने' का इंतजार करते रहेंगे।


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