कागज़ों तक सीमित पुस्तक परिवहन, निजी खर्चे पर पुस्तकें ढोने को मजबूर शिक्षक
- कटनी में शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार पर जिला पंचायत सदस्य ने उठाए सवाल
- DPC और BRC की मिलीभगत के आरोप, स्क्रीनशॉट भी आए सामने
- नियमों की धज्जियां उड़ाकर 15 साल से जमे हैं पसंदीदा जनशिक्षक
- कटनी (विशेष संवाददाता)।
एक तरफ देश भर में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी तरफ कटनी जिले से शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर हो रहे गड़बड़झाले की खबर सामने आई है। मामला प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों के लिए आने वाली निःशुल्क पुस्तकों के परिवहन घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कागज़ों पर परिवहन का खेल चलाकर शासन के लाखों रुपयों की लूट की जा रही है।
27 लाख का टेंडर, फिर भी शिक्षक कर रहे परिवहन
जिला पंचायत सदस्य मोहिनी देवी पांडे ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत कटनी को लिखित शिकायत सौंपकर इस घोटाले का पर्दाफाश किया है। शिकायती पत्र के अनुसार:
- राज्य शिक्षा केंद्र के नियमानुसार निःशुल्क पुस्तकों का परिवहन ठेकेदार के माध्यम से सीधे प्रत्येक विद्यालय तक किया जाना अनिवार्य है।
- कटनी जिले में पुस्तक परिवहन के लिए 'जय माँ जालपा समूह' को लगभग 25 से 27 लाख रुपये का कार्यादेश जारी किया गया था।
- आरोप है कि यह कार्यादेश केवल कागज़ों तक ही सीमित है। जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत डीपीसी (DPC), बीआरसी (BRC) और सीएसी (CAC) की मिलीभगत से शिक्षकों को अध्यापन कार्य छोड़कर स्वयं के खर्च पर संकुल केंद्रों से किताबें लानी पड़ रही हैं।
- जन शिक्षा केंद्र हीरापुर कौड़िया में पदस्थ जन शिक्षक अरुण सिंह परिहार मूल रूप से 'खेल शिक्षक' हैं।
- शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि खेल शिक्षकों को कोई अतिरिक्त प्रभार या जवाबदेही नहीं दी जा सकती।
- इसके बावजूद, राज्य शिक्षा केंद्र के 3 वर्ष की प्रतिनियुक्ति नियम को दरकिनार कर वे वर्ष 2011 से लगातार (बीते 15 वर्षों से) जन शिक्षक के पद पर जमे हुए हैं।
- इस पूरे पुस्तक परिवहन घोटाले की प्राथमिकता और गंभीरता के साथ विशेष जाँच कराई जाए।
- शासकीय धनराशि के दुरुपयोग को रोकते हुए दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
स्क्रीनशॉट से हुआ पर्दाफाश: पिपरौध, हीरापुर कौड़िया और देवरी हटाई संकुल सहित जिले के अन्य जन शिक्षा केंद्रों के वॉट्सऐप स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि शिक्षकों पर स्वयं पुस्तकें ले जाने का दबाव बनाया जा रहा है।
15 साल से एक ही पद पर 'खेल शिक्षक', नियमों की अनदेखी
पुस्तक परिवहन घोटाले के साथ-साथ जन शिक्षकों की नियुक्ति में भी बड़े स्तर पर अनियमितता का मामला सामने आया है।
निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई की माँग
जिला पंचायत सदस्य मोहिनी देवी पांडे ने सीईओ से मांग की है कि:
इस शिकायत के बाद से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।

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