कटनी में आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण पर कानूनी घमासान: बिना कलेक्टर अनुमति के फर्जीवाड़े का आरोप
विशेष रिपोर्ट | कटनी (म.प्र.)
कटनी। म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के नियमों को दरकिनार कर आदिवासी भूमि के अवैध नामांतरण और बंटवारे का एक गंभीर मामला सामने आया है। तृतीय व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड), कटनी के न्यायालय में दाखिल याचिका के अनुसार, कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना अनुसूचित जनजाति (ST) की भूमि गैर-आदिवासी के पक्ष में अंतरित करने और फर्जी संबंधों का सहारा लेकर नियम विरुद्ध आदेश पारित कराने का आरोप लगाया गया है।
मामले के मुख्य बिंदु:
- न्यायालय: तृतीय व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड, कटनी (म.प्र.)
- वादी: वीरेंद्र जैन एवं अन्य (पूर्व निर्वाचित सरपंच व समाजसेवी)
- प्रतिवादी: अमित कुमार दोदवानी एवं अन्य
क्या है पूरा विवाद?
वादी पक्ष (वीरेंद्र जैन एवं अन्य) ने सी.पी.सी. के आदेश 1 नियम 8 के तहत न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि:
- कलेक्टर अनुमति का उल्लंघन: म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के प्रावधानों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति की भूमि का किसी गैर-आदिवासी के पक्ष में बिना कलेक्टर की अनुमति के हस्तांतरण नहीं किया जा सकता।
- गलत बंटवारा आदेश: प्रतिवादी क्रमांक-4 (अनुसूचित जनजाति की महिला) की स्वामित्व वाली भूमि को हासिल करने के लिए प्रतिवादी क्रमांक-2 व 3 ने स्वयं को उनका पुत्र व पुत्री दर्शाया। उन्होंने नायब तहसीलदार पहाड़ी के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत कर दिनांक 08-02-2013 को कानून के विरुद्ध आपसी बंटवारे का आदेश पारित करा लिया।
- गैर-आदिवासी पृष्ठभूमि का दावा: आवेदन में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रतिवादी क्रमांक 2 व 3 अनुसूचित जनजाति वर्ग से न होकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से ताल्लुक रखते हैं। उनका पालन-पोषण गैर-आदिवासी परिवेश में हुआ है और आदिवासी समाज ने कभी उन्हें अपने समुदाय के सदस्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का दिया हवाला
याचिका में माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्थापित विधि-विधान का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि:
"यदि किसी संतान का पालन-पोषण गैर-आदिवासी परिवेश में हुआ है और उसने आदिवासी समाज की सामाजिक व आर्थिक वंचनाओं का सामना नहीं किया है, तो केवल माता के अनुसूचित जनजाति (ST) होने के आधार पर उसे ST वर्ग का लाभ नहीं दिया जा सकता।"
समाजसेवियों ने उठाई न्याय की मांग
आदिवासी समाज के हितों और भू-राजस्व संहिता के संरक्षण के लिए आगे आए समाजसेवियों ने न्यायालय से इस अवैध आदेश को रद्द करने और भू-माफिया/फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कटनी के राजस्व और कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है।


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