खदान की तेज ब्लास्टिंग से थर्राया भटूरा-पढ़रेही गांव: मकानों में आईं गहरी दरारें, दहशत में ग्रामीण
हैवी ब्लास्टिंग से कांप उठती है धरती, घरों से बाहर भागने को मजबूर लोग; ओवरलोड डंपरों ने प्रधानमंत्री सड़क को भी किया जर्जर
मुख्य बाते
- लोकेशन: कैमोर-मैहर मार्ग स्थित भटूरा-पढ़रेही गांव (कटनी)।
- समस्या: नियमों को ताक पर रखकर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग से दर्जनों मकानों की दीवारें और छतें क्षतिग्रस्त।
- सड़क बदहाल: खदान से निकलने वाले ओवरलोड डंपरों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क को जगह-जगह से उखाड़ा।
- मांग: ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच, ब्लास्टिंग पर नियंत्रण और क्षतिग्रस्त मकानों के सर्वे व मुआवजे की मांग की।
विशेष संवाददाता, कटनी कैमोर-मैहर मार्ग पर स्थित भटूरा-पढ़रेही गांव में इन दिनों माइनिंग (खदान) संचालन की लापरवाही के कारण ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। खदान में कथित रूप से की जा रही नियमों के विरुद्ध 'हैवी ब्लास्टिंग' (भारी धमाकों) ने पूरे गांव को खौफ के साए में धकेल दिया है। रोजाना होने वाले इन तेज धमाकों के कारण ग्रामीणों के आशियाने तिनके की तरह हिल रहे हैं, जिससे दर्जनों मकानों की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं।
हर धमाके के साथ कांप उठता है पूरा गांव, बड़े हादसे का डर
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खदान में होने वाली ब्लास्टिंग की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि धमाका होते ही पूरा गांव थर्रा उठता है। कई परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब भी ब्लास्टिंग होती है, मकान गिरने के डर से लोग बच्चों और बुजुर्गों को लेकर आनन-फानन में घरों से बाहर खुले मैदान की तरफ भागते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, लगातार हो रहे इन धमाकों से अब तक दर्जनों मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर रोक नहीं लगाई, तो कभी भी कोई मकान भरभराकर गिर सकता है और कोई बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता है।
ओवरलोड डंपरों ने तोड़ी प्रधानमंत्री सड़क की कमर
खदान प्रबंधन की मनमानी यहीं खत्म नहीं होती। ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि खदान से गिट्टी-पत्थर लेकर निकलने वाले भारी और ओवरलोड डंपरों ने गांव की लाइफलाइन को बर्बाद कर दिया है। 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' के तहत लाखों की लागत से बनी चमचमाती सड़क इन भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण जगह-जगह से पूरी तरह उखड़ चुकी है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन से मुआवजे और सख्त कार्रवाई की गुहार
पीड़ित ग्रामीणों ने अब इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- तत्काल एक प्रशासनिक टीम भेजकर खदान में हो रही ब्लास्टिंग की तीव्रता की जांच की जाए और इस पर नियंत्रण लगाया जाए।
- राजस्व विभाग के माध्यम से क्षतिग्रस्त हुए सभी मकानों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिलाया जाए।
- बदहाल हो चुकी प्रधानमंत्री सड़क की मरम्मत कराई जाए और ओवरलोड वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
अब देखना यह होगा कि माइनिंग विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
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