कटनी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जर्जर सड़कें दे रहीं हादसों को न्योता
विशेष रिपोर्ट कटनी
कटनी। कटनी नगर निगम की कार्यशैली और प्रशासनिक रवैये को लेकर स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों में भारी असंतोष व्याप्त है। एक तरफ जहां निगम की निर्णय प्रक्रिया पर तानाशाही और मनमर्जी के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की प्रमुख सड़कों की बदहाली आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है।
सत्ता व मनोनीत सदस्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल
हाल ही में एल्डरमैन (मनोनीत सदस्यों) की मनोनयन प्रक्रिया और निगम की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि निगम में सर्वसम्मति और समानता के अधिकार की अनदेखी की जा रही है।
इस प्रशासनिक ढर्रे पर विपक्षी दलों ने भी कड़ा रुख अपनाया है:
- कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला ने नगर निगम के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि निगम जनहित को दरकिनार कर केवल अपनी मनमर्जियों में व्यस्त है।
- आम आदमी पार्टी (आप) जिलाध्यक्ष अनिल सिंह सेंगर ने भी नामांकनों और निगम के फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए हैं।
कलेक्ट्रेट गेट से कटाये घाट मोड़ तक 'मौत के गड्ढे'
निगम की इस कथित बेरुखी का सबसे बड़ा खामियाजा शहर की सड़कों पर चलने वाले राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। माधव कलेक्ट्रेट गेट से लेकर कटाये घाट मोड़ तक सड़क की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
- जानलेवा स्थिति: सड़क के बीचों-बीच बड़े और गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो दूर से दिखाई नहीं देते।
- दुपहिया चालकों के लिए बड़ा जोखिम: इन गड्ढों में यदि किसी दुपहिया वाहन का पहिया चला जाए, तो वाहन चालक का संतुलन बिगड़ना और दुर्घटनाग्रस्त होना लगभग तय है।
- सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न: प्रशासनिक केंद्र (कलेक्ट्रेट) के इतने समीप मुख्य मार्ग का यह हाल नगर निगम की उदासीनता को उजागर करता है।
बड़ा सवाल: यदि इन जानलेवा गड्ढों के कारण कोई गंभीर दुर्घटना या जनहानि होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा—प्रशासन या फिर अपनी ही धुंध में मस्त नगर निगम?
स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि नगर निगम तुरंत अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करे और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़कों की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराए।

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