सरकारी राशन पर 'रसूख' का पहरा!
कैलवारा खुर्द - सरकार बच्चों के पोषण के लिए तिजोरी खोल रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव में एमडीएम का संचालन चाहे कोई भी स्वयं सहायता समूह (SHG) कर रहा हो, लेकिन राशन दुकान से उठने वाला सरकारी गल्ला (अनाज), किराना और सब्जियां स्कूल या समूह के केंद्र पर जाने के बजाय सीधे पूर्व सरपंच माधुरी भूषण पाठक के निजी निवास पर पहुंच रही हैं।
बच्चों का निवाला, पूर्व सरपंच का घर: आखिर क्यों?
बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सरकार समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और स्कूलों में सीधे सामग्री आपूर्ति करने का दावा करती है, तो फिर कैलवारा खुर्द का पूरा एमडीएम तंत्र एक पूर्व जनप्रतिनिधि के घर के इर्द-गिर्द क्यों सिमट गया है?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय है कि क्या समूह केवल कागजों पर काम कर रहे हैं और परदे के पीछे से पूरी कमान आज भी पूर्व सरपंच के हाथ में है? नियमों को ताक पर रखकर सरकारी राशन को एक निजी घर में एकत्रित करना कई गंभीर संशय पैदा करता है:
- गुणवत्ता और मात्रा में हेरफेर की आशंका: जब सामग्री आधिकारिक निगरानी से दूर किसी निजी स्थान पर रखी जाएगी, तो उसकी सही मात्रा और बच्चों तक पहुंचने वाली गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है।
- समूहों की संप्रभुता पर चोट: यह स्थिति दर्शाती है कि या तो महिला स्व-सहायता समूह रसूखदारों के दबाव में हैं या फिर व्यवस्था जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।
क्या कहता है कानून? (कानूनी पहलू)
मध्याह्न भोजन योजना के दिशा-निर्देशों और पंचायती राज अधिनियम के तहत यह कृत्य पूरी तरह अवैध और दंडनीय है:
नियम 1: सरकारी राशन और एमडीएम की सामग्री का भंडारण केवल स्कूल के स्टोर रूम या अधिकृत समूह के पंजीकृत पते पर ही हो सकता है। किसी भी गैर-अधिकृत या निजी व्यक्ति (चाहे वह पूर्व सरपंच ही क्यों न हो) के घर पर इसे रखना 'सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग' और 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत जांच का विषय है।
नियम 2: पूर्व सरपंच वर्तमान में कोई प्रशासनिक पद पर नहीं हैं। ऐसे में सरकारी राशन की सुपुर्दगी या उसका नियंत्रण उनके पास होना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
जनता के चुभते सवाल और प्रशासन की चुप्पी
इस मामले ने पंचायत के वर्तमान प्रबंधन और महिला बाल विकास विभाग/शिक्षा विभाग के पर्यवेक्षकों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की खबर नहीं है? या फिर 'ऊपर से नीचे तक' सब कुछ मैनेज है?
कैलवारा खुर्द के जागरूक नागरिकों ने अब इस मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस रसूखदारी पर कब हंटर चलाता है और बच्चों के हक के राशन को इस 'निजी कैद' से कब आज़ाद कराता है।
— विशेष ब्यूरो

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