विशेष रिपोर्ट:

 पीएम आवास योजना और भ्रष्टाचार का साया

आया 'कमाई' का मौसम: पीएम आवास की लिस्ट आते ही लाभार्थियों से ज्यादा बिचौलिए खुश, वसूली का खेल शुरू!

कटनी 

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की नई सूची जारी होते ही एक तरफ जहाँ जरूरतमंदों के चेहरों पर बरसों पुराने पक्के मकान के सपने को सच होता देख खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सफेदपोशों और बिचौलियों की बांछें खिल गई हैं। उनके लिए मानो 'कमाई का मौसम' आ गया है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, लिस्ट में नाम आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय दलालों और कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की जुगलबंदी ने लाभार्थियों की जेब पर डाका डालने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है।

जरूरतमंदों की ख़ुशी पर ग्रहण लगाने की तैयारी

​नियमों के मुताबिक, पीएम आवास योजना पूरी तरह से निःशुल्क है और इसका लाभ सीधे पात्र व्यक्ति को मिलना चाहिए। लेकिन हकीकत के धरातल पर कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकतर ग्राम पंचायतों से खबरें आ रही हैं कि जैसे ही किसी गरीब का नाम लिस्ट में आया है, दलाल उसके घर के चक्कर काटने लगे हैं। पहली किस्त जारी कराने से लेकर वेरिफिकेशन के नाम पर हजारों रुपयों के एडवांस डिमांड और 'कट मनी' की सेटिंग शुरू हो चुकी है। जिन लोगों के चेहरों पर पक्के मकान की वाजिब ख़ुशी होनी चाहिए थी, वे अब इस बात से चिंतित हैं कि दलालों की मांग पूरी न करने पर कहीं उनका नाम न कटवा दिया जाए।

कर्मचारियों और दलालों की 'सक्रिय मिलीभगत'

​विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल में कुछ स्थानीय स्तर के कर्मचारी भी परदे के पीछे से भूमिका निभा रहे हैं। बिना उनकी शह के किसी भी दलाल की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि वह सीधे लाभार्थियों से संपर्क साधे। सूची के सत्यापन (वेरिफिकेशन) और जियो-टैगिंग जैसी प्रक्रियाओं को हथियार बनाकर लाभार्थियों को डराया जा रहा है।

बड़ा सवाल: सरकार गरीबों को छत देने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन अगर इसका एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा, तो योजना का मूल उद्देश्य कैसे पूरा होगा?


कड़े दिशानिर्देश और सख्त निगरानी की दरकार

​इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब समय आ गया है कि शासन और उच्च स्तर के अधिकारी मूकदर्शक बने रहने के बजाय सख्त रणनीति अख्तियार करें।

  • नोडल अधिकारियों की तैनाती: जिला प्रशासन को हर ब्लॉक और पंचायत स्तर पर विशेष नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगानी चाहिए, जो सीधे लाभार्थियों के संपर्क में रहें।
  • निगरानी तंत्र (वॉचिंग): दलालों और संदिग्ध कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक गोपनीय विजिलेंस या इंटेलिजेंस टीम सक्रिय की जाए।
  • एंटी-करप्शन हेल्पलाइन: हर गांव में पंचायत भवनों पर स्पष्ट रूप से शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर लिखे जाएं, ताकि कोई भी गरीब बिना किसी डर के शिकायत कर सके।

​अगर समय रहते इन बिचौलियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ दलालों की तिजोरी भरने का जरिया बनकर रह जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस संगठित वसूली रैकेट को तोड़ने के लिए क्या कदम उठाता है।


Comments

Popular posts from this blog

मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल तपस्या परिहार कटनी की नई निगमायुक्त, शिशिर गेमावत का भी तबादला, शासन ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कई IAS अधिकारियों के तबादले

जनपद पंचायत कटनी में वर्षों से जमे रोजगार सहायक, तबादलों पर प्रशासन की चुप्पी

बड़ी खबर- कटनी जिला उद्योग विभाग मे फर्जीवाड़े की खुलने लगी परते