विकास के नाम पर विनाश की गवाही देता 'कटनी'
ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा पेचवर्क; सीवर लाइन ने पूरे शहर को किया 'बीमार'
कटनी।
कहते हैं सड़कें किसी भी शहर की जीवनरेखा होती हैं, लेकिन संस्कारधानी के मुहाने पर खड़े कटनी शहर की जीवनरेखा इन दिनों खुद 'वेंटिलेटर' पर है। नगर निगम प्रशासन का सड़कों को सुधारने का दावा ज़मीन पर आते ही 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहा है। शहर के किसी भी कोने से गुज़र जाइए, यह समझ पाना मुश्किल है कि पेचवर्क कहाँ हुआ है और कहाँ नहीं। सीवर लाइन परियोजना ने पूरे शहर को एक ऐसे दलदल और मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है, जिसने पूरे कटनी को बीमार सा कर दिया है।
'खोद दिया शहर, भूल गए सुधारना'
सीवर लाइन बिछाने के लिए जिस बेदर्दी से शहर के सीने को चीरा गया, उसे वापस भरने में उतनी ही घोर लापरवाही बरती गई। मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी इलाकों की गलियों तक, हर जगह आधी-अधूरा गड्ढे और बेतरतीब मिट्टी-गिट्टी बिखरी पड़ी है।
निगम प्रशासन कागजों पर लाखों रुपये का 'पेचवर्क' चमका रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह पेचवर्क एक दिन की बारिश या गाड़ियों के पहियों के नीचे आकर उखड़ जाता है। जनता पूछ रही है—"यह कैसा सुधार है जो दिखाई ही नहीं देता?"
आम आदमी बेहाल, अस्पतालों में बढ़ी कतारें
सीवर लाइन की इस बदइंतजामी का सबसे बड़ा खामियाजा कटनी का आम आदमी भुगत रहा है।
- स्वास्थ्य पर वार: खुदी हुई सड़कों से उड़ने वाले धूल के गुबार ने लोगों का दम घोंट दिया है। शहर में दमा, एलर्जी, आंखों में इन्फेक्शन और सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
- कमरतोड़ सफर: गड्ढों से लबालब सड़कें लोगों को रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के दर्द का परमानेंट मरीज बना रही हैं।
- रोज के हादसे: दोपहिया वाहन चालक आए दिन इन अधूरे पेचवर्क और सीवर के गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
- तालमेल की कमी क्यों? जब पता था कि सीवर लाइन का काम होना है, तो सड़कों के रेस्टोरेशन (बहाली) का पुख्ता प्लान ठेकेदार और निगम के पास क्यों नहीं था?
- कैसा है यह पेचवर्क? जो पेचवर्क हफ्ते भर भी नहीं टिक पा रहा, उसकी गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है? या फिर जनता की गाढ़ी कमाई को सिर्फ लीपापोती में बहाया जा रहा है?
- ज़िम्मेदारी किसकी? यदि इस बदहाली के कारण किसी की जान जाती है, तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा—नगर निगम या सीवर प्रोजेक्ट की एजेंसी?
"हम टैक्स देते हैं ताकि हमें सुविधाएं मिलें, लेकिन यहाँ तो बीमारी बांटी जा रही है। सीवर लाइन ने हमारे सुंदर शहर को एक बदसूरत मलबे के ढेर में बदल दिया है।"
— रमेश कुमार, स्थानीय निवासी, कटनी
सवालों के घेरे में नगर निगम: जनता के तीखे सवाल
निष्कर्ष: अब कागजी दावों से बाहर आए निगम
कटनी की जनता अब झूठे आश्वासनों और कागजी पेचवर्क से थक चुकी है। शहर को इस 'बीमारी' से बचाने के लिए नगर निगम को ठेकेदारों पर सख्ती करनी होगी और युद्ध स्तर पर मुकम्मल सड़क निर्माण की दिशा में काम करना होगा। वरना, कागजों का यह 'जीरा' जनता के गुस्से के ऊंट को शांत नहीं कर पाएगा।
- ब्यूरो रिपोर्ट, कटनी।

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