कटनी में 'जय-वीरू' की जुगलबंदी: क्या फिर इतिहास दोहराने की तैयारी में हैं आरटीओ संतोष पाल?
जबलपुर में लगा था 'धनकुबेर' का तमगा, अब कटनी परिवहन विभाग के गलियारों में चर्चाएं गर्म; क्या बाहरी ताकतों के 'सिस्टम' से चल रहा है खेल?
विशेष खोजी रिपोर्ट (कटनी)
कटनी। साल 2022 का वो मंजर आज भी मध्य प्रदेश के प्रशासनिक और मीडिया हलकों में भूला नहीं है, जब जबलपुर आरटीओ रहे संतोष पाल के ठिकानों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने दबिश दी थी। उस वक्त आलीशान बंगले, असीमित संपत्ति और ठाट-बाट देखकर हर किसी की आंखें फटी की फटी रह गई थीं। मीडिया संस्थानों ने उन्हें एक ही नाम दिया था—"प्रशासन का धनकुबेर"। आय से अधिक संपत्ति के उस मामले में EOW की जांच की आंच आज भी ठंडी नहीं हुई है, लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल कटनी के प्रशासनिक गलियारों में तैरने लगा है: क्या जो खेल जबलपुर में हुआ था, वही स्क्रिप्ट अब कटनी में भी लिखी जा रही है?
'जय और वीरू' का वो कथित संगठन और बाहरी ताकतें
कटनी परिवहन विभाग (RTO) में इन दिनों चर्चाएं किसी सरकारी आदेश की नहीं, बल्कि 'सिस्टम' की हो रही हैं। सूत्रों की मानें तो कटनी में कदम रखते ही आरटीओ संतोष पाल का तालमेल कुछ ऐसी बाहरी ताकतों के साथ बैठ गया है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरा खेल संचालित करती हैं।
चर्चाओं के बाजार में दो काल्पनिक नाम 'जय' और 'वीरू' तेजी से गूंज रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन दोनों किरदारों के संगठन और प्रभाव का इस्तेमाल कर एक ऐसा मजबूत 'नेटवर्क' तैयार कर लिया गया है, जो आरटीओ के इर्द-गिर्द सुरक्षा कवच और कमाई का जरिया, दोनों का काम कर रहा है। स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्टर्स के बीच सुगबुगाहट है कि बाहरी ताकतों के साथ यह जुगलबंदी इतनी सटीक है कि यहां बिना इस 'सिस्टम' की मर्जी के पत्ता भी नहीं हिलता।
क्या कटनी में भी फटेगा 'धनकुबेर' का मटका?
जबलपुर की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, लेकिन कटनी की मौजूदा स्थिति को देखकर प्रबुद्ध नागरिकों और जानकारों का कहना है कि इतिहास खुद को दोहराने की कगार पर है।
"जब किसी अधिकारी के तार विभागीय नियमों से ज्यादा बाहरी संगठनों और 'जय-वीरू' जैसे बिचौलियों से जुड़ने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि सिस्टम में कुछ बड़ा पक रहा है। कटनी जिला पहले ही कई मामलों में संवेदनशील रहा है, ऐसे में परिवहन विभाग की यह कथित सांठगांठ किसी बड़े धमाके की ओर इशारा कर रही है।"
— (नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय विश्लेषक)
जांच एजेंसियों की नजर या फिर ढीली कमान?
बड़ा सवाल यह है कि जब एक अधिकारी पहले से ही EOW जैसी बड़ी एजेंसी की रडार पर हो, तो कटनी में उनके इस कथित 'फ्री हैंड' और बाहरी ताकतों के साथ तालमेल पर वरिष्ठ अधिकारियों और खुफिया तंत्र की नजर क्यों नहीं है? क्या कटनी जिला भी जबलपुर की तरह सिर्फ एक और बड़ी कार्रवाई का गवाह बनने का इंतजार कर रहा है, या फिर इस बार समय रहते इस 'सिस्टम' पर लगाम कसी जाएगी?
फिलहाल, कटनी आरटीओ कार्यालय के भीतर और बाहर की खामोशी किसी बड़े तूफान के आने का संकेत दे रही है। 'जय और वीरू' की यह जोड़ी और आरटीओ साहब का यह नया गढ़, आने वाले दिनों में क्या रंग दिखाता है, इस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।

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