*कटनी उद्योग विभाग में तानाशाही का आरोप!प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह को सौंपा शिकायती पत्र, महाप्रबंधक सहित कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप; निष्पक्ष जांच और कार्यवाही की मांग*
कटनी। जिले के द जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं एमपी न्यूज़ जंक्शन के चीफ एडिटर मनोज सिंह परिहार ने मध्यप्रदेश शासन के कटनी जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र कटनी में पदस्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत महाप्रबंधक ज्योति सिंह चौहान एवं सहायक प्रबंधक राजेश कुमार पटेल की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार केवल विकलांगता प्रमाण-पत्र की प्रति उपलब्ध कराई गई,जबकि नियुक्ति आदेश एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
*सुनवाई" के नाम पर बंद कमरे में दबाव और मारपीट का आरोप*
शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रथम अपील के बाद उन्हें दिनांक 07 अप्रैल 2026 को सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाया गया। उनके अनुसार,दो पत्रकार साथी बाहर रोक दिए गए और उन्हें अकेले महाप्रबंधक के चेंबर में बुलाकर दरवाजा बंद कर लिया गया।
शिकायत में आरोप है कि सूचना का अधिकार आवेदन वापस लेने एवं समझौता करने के लिए दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि समझौता और लेनदेन से इनकार करने पर वहां मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, गाली-गलौज की गई, कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की एवं मारपीट की गई तथा झूठे प्रकरण में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग
शिकायत में कहा गया है कि घटना के समय उनके साथ आए पत्रकार कार्यालय के बाहर मौजूद थे। अंदर से आवाजें सुनाई देने पर वे पहुंचे। शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की है।
*दलित कर्मचारी के उत्पीड़न का भी आरोप*
शिकायती पत्र में विभाग के कर्मचारी अजय कुमार सागर के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार,जातिगत अपमान, मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि अजय सागर द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को कई शिकायतें दी गईं, लेकिन कार्यवाही के बजाय उनका स्थानांतरण कर दिया गया। बाद में उन्हें उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त हुआ।
*नियम विरुद्ध अनुशंसाओं और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप*
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग में पूर्व में कई औद्योगिक इकाइयों को नियमों के विपरीत कोल वितरणहेतु अनुशंसाएं दी गईं। साथ ही कर्मचारियों की मिलीभगत से दोहरे बिल भुगतान एवं अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
*कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल*
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों द्वारा कार्यालय समय का पालन नहीं किया जाता, शासकीय दस्तावेज निजी व्यक्तियों तक पहुंचाने के मामले सामने आए तथा कर्मचारियों के विरुद्ध कथित समाचार चलवाने जैसी घटनाएं भी हुईं। इन सभी मामलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।
*प्रभारी मंत्री से की ये प्रमुख मांगें*
शिकायतकर्ता ने प्रभारी मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थm अधिकारियों एवं कर्मचारियों का अन्य जिलों में स्थानांतरण किया जाए।
सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
शिकायतकर्ता एवं गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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