पहली ही बारिश में डूबे आशियाने: लाखों का सफाई बजट साफ, नगर निगम वार्ड पार्षद ने जनता को कहा— 'पानी तो ऐसे ही घुसेगा'
कटनी
वंशरूप वार्ड चंदी की दफाई वरगवा
वर्गमा। मानसून की पहली ही दस्तक ने नगर निगम के दावों और कागजी तैयारियों की धज्जियाँ उड़ाकर रख दी हैं। वर्गमा वन स्वरूप के वार्ड चंदे की दफाई में पहली ही बारिश के बाद जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने नगर निगम के 'सफाई अभियान' की पोल खोल दी है। करोड़ों-लाखों रुपये के बजट का ढिंढोरा पीटने वाले निगम की लापरवाही का खामियाजा आज यहाँ की जनता भुगत रही है। पहली बारिश क्या हुई, लोगों के घरों में गंदा पानी और कीचड़ तैरने लगा।
कागज़ पर गहरी, ज़मीन पर कचरे से भरी हैं नालियाँ
स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। आक्रोशित जनता ने बताया कि उनके इलाके में नालियों की गहराई करीब डेढ़ से दो फीट या उससे भी अधिक है। कायदे से इस गहराई में पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के होना चाहिए था। लेकिन हकीकत यह है कि नालियाँ कचरे, गाद और प्लास्टिक से चोक पड़ी हैं। लंबे समय से सफाई न होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर फैला और देखते ही देखते लोगों के बेडरूम और किचन तक में घुस गया।
"क्या हम इसी दिन के लिए टैक्स भरते हैं?"
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से नगर निगम को टैक्स देते हैं। जनता की गाढ़ी कमाई के इसी पैसे को शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए वितरित किया जाता है। लेकिन वार्ड की यह बदहाली साफ बयां कर रही है कि जनता का पैसा जनहित में नहीं, बल्कि लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है।
वार्ड पार्षद का गैर-जिम्मेदाराना बयान: "पानी तो ऐसे ही घुसेगा"
इस पूरी त्रासदी में सबसे हैरान और शर्मसार करने वाला रवैया नगर निगम के वार्ड पार्षद का रहा। जब परेशान और पानी में डूबे नागरिकों ने इस अव्यवस्था को लेकर जब वार्ड पार्षद से बात की, तो समाधान या सांत्वना देने के बजाय उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया। उन्होने साफ कह दिया— "पानी तो ऐसे ही घुसेगा।" (राजकुमार तिवारी स्थानीय निवासी)
यह संवेदनहीन बयान साफ दर्शाता है कि जनता के प्रति निगम का रवैया कितना उदासीन हो चुका है।

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