'भगवान भरोसे' कटनी का PWD महकमा: जब जनप्रतिनिधियों को ही नहीं मिलता भाव, तो आम जनता का क्या होगा हाल?
कटनी
दिनांक: 01 जुलाई, 2026
कटनी का लोक निर्माण विभाग (PWD) इन दिनों अपनी 'अति-व्यस्तता' या यूँ कहें कि 'लापरवाही' के चरम पर है। शासन ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर शायद काम का इतना भारी बोझ लाद दिया है कि अब उन्हें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से भी मिलने की फुर्सत नहीं है। साहबों के पास न तो समय है और न ही जनप्रतिनिधियों के प्रति कोई सम्मान। ऐसा ही एक शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना रवैया आज PWD कार्यालय कटनी में देखने को मिला, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।
चिट्ठी भेजने के बाद भी आधे घंटे का इंतजार, फिर मैडम कार में होकर रफूचक्कर
पूरा मामला आज दिनांक 1 जुलाई 2026 का है। ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द के सरपंच छुटटू कोल और पंच नीरज पांडे अपनी पंचायत की जनसमस्याओं को लेकर PWD कटनी की मुखिया इंजीनियर (E) शारदा सिंह से मिलने पहुंचे थे।
सरपंच और पंच ने बकायदा शिष्टाचार का पालन करते हुए अपनी पर्ची/चिट्ठी अंदर मैडम के केबिन में भिजवाई। लेकिन साहिबा का रवैया देखिए! जनप्रतिनिधि बाहर आधे घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे और अंदर बैठीं ई महोदया के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। हद तो तब हो गई जब आधे घंटे बाद शारदा सिंह बिना सरपंच-पंच से मिले, अपनी कुर्सी से उठीं और सीधे अपनी गाड़ी में बैठकर चली गईं।
सवाल यह उठता है कि: क्या कटनी PWD के अधिकारियों के लिए जनता के चुने हुए सरपंच-पंच की हैसियत एक आम कागज़ के टुकड़े से भी कम है? अगर किसी विभाग की ई के पास जनप्रतिनिधियों के लिए 2 मिनट का समय नहीं है, तो वह जनता की समस्याओं का खाक निराकरण करेंगी?
10 से ज्यादा बार लगाया फोन, पर इंजीनियर बत्रा ने नही उठाया फोन
E साहिबा के इस रवैये से आहत होकर जब जनप्रतिनिधियों ने वहां तैनात इंजीनियर बत्रा जी से संपर्क साधने की कोशिश की, तो एक अलग ही तमाशा देखने को मिला। सरपंच और पंच द्वारा बत्रा जी के मोबाइल पर एक या दो बार नहीं, बल्कि 10 से अधिक बार फोन लगाया गया, लेकिन साहब ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
अब इसे काम का दबाव कहें या अधिकारियों की तानाशाही? कटनी PWD के इन जिम्मेदारों का यह बर्ताव साफ जाहिर करता है कि उन्हें शासन और प्रशासन के नियमों का कोई खौफ नहीं है।
आखिर कब जागेगा कुंभकर्णी नींद से प्रशासन?
इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि कटनी के पीडब्ल्यूडी विभाग की कमान फिलहाल 'भगवान भरोसे' ही चल रही है। जब सरपंच और पंच जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अधिकारियों से मिलने के लिए इस तरह अपमानित होना पड़ रहा है, तो दूर-दराज के गांवों से आने वाली गरीब जनता का क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु जिन पर शासन को संज्ञान लेना चाहिए:
- क्या PWD के अधिकारियों के लिए कोई 'विजिटिंग ऑवर' तय नहीं है?
- जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने वाली ई शारदा सिंह पर क्या कार्रवाई होगी?
- 10 बार फोन न उठाने वाले इंजीनियर बत्रा जी की इस लापरवाही का जवाबदेह कौन है?
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर कटनी में 'अफसरशाही' इसी तरह लोकतंत्र के नुमाइंदों पर हावी रहेगी।

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