​कटनी आरटीओ में 'अघोषित' बाहरी राज: सरकारी कुर्सी पर बैठे संतोष पाल का गैर-जिम्मेदाराना कबूलनामा, प्राइवेट गाड़ी और रीवा के 'सिंडिकेट' पर उठते सुलगते सवाल


कटनी, 7 जुलाई 2026

​कटनी। भ्रष्टाचार और नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाला कटनी आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। कल, दिनांक 6 जुलाई 2026 को समय-सीमा (TL) बैठक से बाहर निकलते ही कटनी आरटीओ संतोष पाल ने मीडिया के कैमरों के सामने एक ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान दे डाला, जिसने प्रशासनिक शुचिता और सरकारी तंत्र की गरिमा को तार-तार कर दिया है।

​जब मीडियाकर्मियों ने आरटीओ संतोष पाल से सीधा सवाल किया कि “आखिर रीवा से आए मृदुल खान (मंटू खान) कौन हैं? और कटनी आरटीओ में बाहरी एजेंटों की इतनी मनमानी क्यों हावी है?” तो इस पर आरटीओ साहब ने जो जवाब दिया, वह हैरान करने वाला था।

​"चाहे प्राइवेट करे या सरकारी... काम तो हो रहा है ना"

​नैतिकता और जिम्मेदारी को ताक पर रखते हुए आरटीओ संतोष पाल ने बेबाकी (या कहें ढिठाई) से कह दिया:

​"सरकार का काम तो हो रहा है ना, चाहे प्राइवेट करे चाहे सरकारी करे... और चाहे जिम्मेदारी से करे चाहे गैर-जिम्मेदराली से करे।"


​एक जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठे अधिकारी का यह बयान यह साफ करने के लिए काफी है कि कटनी आरटीओ के भीतर सब कुछ राम भरोसे या फिर 'एजेंट भरोसे' चल रहा है। इस बयान के मीडिया के कैमरों में पूरी तरह दर्ज होने से पहले ही आरटीओ साहब वहां से रफूचक्कर हो गए। लेकिन इस एक बयान ने परिवहन विभाग के बड़े दावों की पोल खोल कर रख दी है।

​₹37,800 की प्राइवेट गाड़ी और रीवा का 'कनेक्शन'

​इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब परतें खुलीं, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • ​सरकारी पद पर प्राइवेट वाहन का रौब: आरटीओ संतोष पाल जिस वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह कोई अधिकृत सरकारी गाड़ी नहीं है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार, यह गाड़ी सुनील मिश्रा नाम के व्यक्ति की है, जो किसी ट्रेवल्स के तहत रजिस्टर्ड है। यह एक प्राइवेट नंबर की गाड़ी है, जिसके लिए आरटीओ द्वारा कथित तौर पर ₹37,800 प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है।
  • ​बड़ा सवाल: क्या देश और प्रदेश के सबसे कमाऊ विभागों में से एक (परिवहन विभाग) के अधिकारी के पास खुद का अधिकृत सरकारी वाहन नहीं है? या फिर इस प्राइवेट गाड़ी के खेल के पीछे कोई और ही सांठगांठ छिपी है?
  • ​बाहरी ताकतों का अघोषित सिंडिकेट: रीवा से आए मंटू खान उर्फ मृदुल खान की कटनी आरटीओ में मौजूदगी और दखलअंदाजी अब कोई रहस्य नहीं रह गई है। इस बात की पुष्टि लगभग हो चुकी है कि कटनी आरटीओ के भीतर 'बाहरी ताकतें' पूरी तरह हावी हैं। आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि रीवा से आए इस सिंडिकेट के इशारे पर फाइलें मिनटों में सरक जाती हैं।

​जनता और कानून के साथ भद्दा मजाक

​आरटीओ का यह कहना कि 'काम चाहे जिम्मेदारी से हो या गैर-जिम्मेदारी से', सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को खुली चुनौती है। अगर सरकारी दफ्तरों को दलालों, एजेंटों और बाहरी प्राइवेट लोगों के भरोसे ही चलाना है, तो फिर सरकार इन अधिकारियों को लाखों रुपये की सैलरी और सुविधाएं क्यों दे रही है?

​कटनी की जागरूक जनता और कानूनविदों का मानना है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। एक प्राइवेट गाड़ी में रीवा के रसूखदारों के साथ घूमने वाले आरटीओ संतोष पाल के इस 'गैर-जिम्मेदाराना' बयान पर भोपाल में बैठे आला अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, वरना कटनी आरटीओ केवल भ्रष्टाचार का एक अड्डा बनकर रह जाएगा।

​ब्यूरो रिपोर्ट,


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