आखिर किसका संरक्षण है पूर्व मे सस्पेंड केन्द्र प्रभारी लखन पटेल को आखिर सस्पेंड होने के बाद भी पुनः क्यो दी गयी मूंग खरीदी केन्द्र की जिम्मेदारी क्या प्रभारियो की कमी हो गयी प्रशासन के पास
अधिकारियों के नाक के नीचे भ्रष्टाचार का नंगा नाच: 50 किलो की बोरी में 51.200 KG का 'डाका'!
कटनी (बड़वारा)
दिनांक: 24 जुलाई 2026
"आवाज उठाओगे तो फसल रिजेक्ट कर देंगे!" — क्या यही है प्रशासनिक तंत्र का असली चेहरा?
कटनी (मध्य प्रदेश):
पसीना बहाकर फसल उगाने वाले अन्नदाता के पेट पर लात मारने का एक और खौफनाक और शर्मनाक खेल उजागर हुआ है! बड़वारा क्षेत्र के बसाढ़ी समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र (पंचमुखी वेयरहाउस) में किसानों से सरेआम ठगी की जा रही है।
नियम कहते हैं कि प्रति बोरी 50 किलो तौल होनी चाहिए, लेकिन केंद्र पर तौल का कांटा 51 किलो 200 ग्राम पर ही रुक रहा है! यानी हर एक बोरी पर सीधे-सीधे 1 किलो 200 ग्राम की डकैती!
धांधली का गंदा खेल: विरोध किया तो सीधी धमकी!
किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने इस खुली लूट का विरोध किया, तो खरीदी केंद्र के प्रभारी ने अहंकार और दबंगई दिखाते हुए साफ कह दिया—
"ज्यादा चूं-चपड़ की तो फसल खराब, कचरा या नमी का बहाना बनाकर पूरी की पूरी खेप रिजेक्ट कर देंगे!"
मजबूर किसान अपने खून-पसीने की कमाई को लुटते देखने और खामोश रहने पर मजबूर हैं।
निष्कासितों की ऐश: गेहूं में सस्पेंड हुए, अब मूंग-उड़द में 'बल्ले-बल्ले'!
सबसे बड़ा और ज्वलंत सवाल यह है कि गत वर्ष शिव रजैया वेयरहाउस में अभद्र व्यवहार और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में सस्पेंड किए गए लखन पटेल को दोबारा प्रभार किसने दिया?
- गेहूं की खरीदी में जो अधिकारी सस्पेंड हुआ, उसे मूंग-उड़द की खरीदी की मलाईदार कमान सौंप दी गई!
- निरीक्षण के दौरान दर्जनों बोरियां बिना टैग के पाई गईं, अधिकारियों ने केवल "निर्देश" दिए और कार्रवाई के नाम पर फिर से खानापूरी कर दी गई!
जलते हुए सवाल जो सीधे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं:
- जानबूझकर डाका: क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बिना 51.200 KG तौल का यह खेल संभव है?
- लाचार निरीक्षण: अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं, तो निरीक्षण का ड्रामा क्यों?
- सस्पेंडेड को इनाम: भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित प्रभारी को दोबारा जिम्मेदारी किस आधार पर और किसके दबाव में मिली?
- अन्नदाता का कसूर क्या: किसान जब तक सहता रहेगा, तब तक यह लूट तंत्र ऐसे ही चलता रहेगा?
किसानों की कड़क मांग:
- तत्काल निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो।
- कड़ी कार्रवाई: दोषी प्रभारी लखन पटेल और कर्मचारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए।
- भरपाई: अतिरिक्त तौले गए अनाज का हिसाब लगाकर किसानों को उनका हक वापस मिले।

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