गुड़ा कला वेयरहाउस में धांधली: सस्पेंशन के बाद भी लखन पटेल का रसूख कायम, खाद्य विभाग की मेहरबानी पर उठे गंभीर सवाल
दिनांक: 25 जुलाई 2026
स्थान: गुड़ा कला (विलायत कला), कटनी (म.प्र.)
कटनी। जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। मामला गुड़ा कला (विलायत कला) स्थित लक्ष्य वेयरहाउसिंग एंड एग्रो सर्विसिंग खरीदी केंद्र का है, जहां अनैतिक आचरण, तौल में गड़बड़ी और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिरे खरीदी प्रभारी लखन पटेल का दबदबा थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व में निलंबित (सस्पेंड) होने के बावजूद लखन पटेल को दोबारा मूंग और उड़द खरीदी केंद्र की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले ने प्रशासनिक निष्पक्षता और विभागीय साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
गेहूं के बाद अब मूंग-उड़द खरीदी पर 'कब्जा'
गेहूं उपार्जन के दौरान हुए विवादों और शिकायतों के बाद लखन पटेल को निलंबित किया गया था। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि निलंबन के बावजूद केंद्र पर उनका प्रभाव कम नहीं हुआ। नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों से "गुप्त सेटिंग" के बल पर वे अब मूंग और उड़द की खरीदी का काम भी देख रहे हैं।
कांटे पर 51.300 किलोग्राम वजन की तस्वीरें मीडिया के माध्यम से चलने के बाद हुई थी सस्पेंशन की कार्यवाही सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार होनी थी सेवा समाप्त की कार्रवाई लेकिन सेटिंग के खेल ने बचा लिया जबकि किसानों के आरोप साफ इशारा कर रहे हैं कि खरीदी केंद्र में तौल का खेल धड़ल्ले से जारी था सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला खाद्य विभाग के पास लखन पटेल के अलावा कोई दूसरा ईमानदार और कर्मठ कर्मचारी नहीं बचा, जिसे इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी जा सके?
किसानों का छलका दर्द: 'कमाई का अड्डा' बना केंद्र
स्थानीय किसानों का आरोप है कि लक्ष्य वेयरहाउस खरीदी केंद्र अब किसानों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि विभागीय साठगांठ से 'कमाई का अड्डा' बन चुका है।
- पारदर्शिता का अभाव: निर्णय लेने और तौल प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
- अतिरिक्त चार्ज की वसूली: किसानों से सेवाओं के बदले मनमाने अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं।
- आम किसान परेशान: बड़े और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि छोटे और आम किसानों को घंटों लाइन में खड़ा कर परेशान किया जा रहा है।
- सुनवाई नहीं: शिकायत करने पर अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और न ही कोई कार्रवाई होती है।
उठते प्रश्न: आखिर किसका संरक्षण?
- सस्पेंशन बेअसर क्यों? निलंबन के बाद भी लखन पटेल को केंद्र पर सक्रिय रहने की छूट किसने दी?
- सेटिंग का खेल: क्या निचले स्तर से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों की मौन सहमति से यह सब खेल चल रहा है?
- पारदर्शिता की धज्जियां: किसान लगातार शिकायतें कर रहे हैं, फिर भी जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है?
किसानों की प्रमुख मांगें
क्षेत्रीय किसानों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मुख्य मांगें हैं:
- खरीदी केंद्र की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच तत्काल कराई जाए।
- विवादित प्रभारी लखन पटेल की संपत्ति और आय की जांच हो।
- गड़बड़ी में दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
- केंद्र की पूरी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन और खाद्य विभाग नींद से जागेगा या फिर यूं ही नियमों को ताक पर रखकर यह "खेल" चलता रहेगा? किसान अब पारदर्शी जांच और कार्रवाई की आस लगाए बैठे हैं।

Comments
Post a Comment