दिनांक: 12 जुलाई 2026
ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द के टिकरिया मे आदिवासी समुदायिक भवन निर्माण में भ्रष्टाचार: सचिव पर गिरी थी गाज, पर कैलवारा खुर्द की पूर्व सरपंच माधुरी भूषण पाठक को किसका संरक्षण?
तत्कालीन सचिव विनोद नायक से ₹2,35,000 की वसूली कर किया गया बहाल, लेकिन मुख्य आरोपी पूर्व सरपंच से शेष रिकवरी पर जिला पंचायत ने साधी चुप्पी।
मामले से जुड़े मुख्य तथ्य
- कार्य का नाम (Work Name): सामुदायिक भवन निर्माण (टिकरिया)
- कार्य आईडी (Work Id): 100933624
- योजना का नाम: अजा-अजजा विभाग - अनुसूचित जनजाति सघन बस्ती विकास योजना
- कुल स्वीकृत राशि: ₹10,00,000.00
- आहरित/भुगतान राशि (Bill Amt): ₹6,47,838.36
- ग्राम पंचायत द्वारा स्वीकृति तिथि: 26/01/2019
टिकरिया। ग्रामीण विकास और आदिवासी कल्याणदावों की धज्जियां उड़ाता एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। अजा-अजजा विभाग की 'अनुसूचित जनजाति सघन बस्ती विकास योजना' के तहत ग्राम पंचायत टिकरिया में स्वीकृत सामुदायिक भवन निर्माण (कार्य आईडी: 100933624) में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस महाघोटाले में प्रशासनिक तंत्र द्वारा दोतरफा नीति अपनाई जा रही है, जिससे यह साफ प्रतीत होता है कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में बैठे रसूखदार लोग भ्रष्टाचारियों को खुला संरक्षण दे रहे हैं।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे कार्य के लिए कुल 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से ₹6,47,838.36 की राशि का आहरण कर लिया गया। तकनीकी मूल्यांकन और धरातल पर हुए निर्माण कार्य में भारी विसंगति पाए जाने के बाद, प्रशासन ने वित्तीय अनियमितता मानते हुए रिकवरी के आदेश जारी किए थे।
सचिव पर गाज, बहाल भी हुए; तो मुख्य रसूखदार पर मेहरबानी क्यों?
इस घोटाले की जांच के पश्चात तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव वीरू नायक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था। प्रशासनिक दबाव के बाद सचिव वीरू नायक से उनके हिस्से की राशि ₹2,35,000 की नकद वसूली भी कर ली गई। वसूली की प्रक्रिया पूरी होते ही विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए वीरू नायक को पुनः सेवा में बहाल कर नई नियुक्ति भी दे दी।
परंतु, सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह उठता है कि इसी वित्तीय गबन में बराबर की भागीदार और मुख्य हस्ताक्षरकर्ता रहीं कैलवारा खुर्द की पूर्व सरपंच माधुरी भूषण पाठक से आज तक एक रुपये की भी वसूली क्यों नहीं की जा सकी है?
"यदि एक ही वित्तीय अपराध के लिए सचिव दोषी है और उससे वसूली की जा सकती है, तो पूर्व सरपंच को कानून के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है? क्या यह प्रशासनिक पक्षपात नहीं है?"
जिला पंचायत की भूमिका पर गंभीर सवाल
पंचायती राज अधिनियम के तहत किसी भी निर्माण कार्य के वित्तीय आहरण के लिए सरपंच और सचिव संयुक्त रूप से जिम्मेदार होते हैं। जब वित्तीय गबन सिद्ध हो चुका है और रिकवरी का एक हिस्सा सचिव से वसूला जा चुका है, तो शेष बड़ी राशि की रिकवरी के लिए कैलवारा खुर्द की पूर्व सरपं।च माधुरी भूषण पाठक को जिला पंचायत द्वारा बार-बार छूट क्यों दी जा रही है?
सूत्रों की मानें तो जिला पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ स्थानीय राजनेताओं के वरदहस्त के कारण ही पूर्व सरपंच के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई या कुर्की की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में सघन बस्ती विकास के लिए आई इस राशि का इस प्रकार से दुरुपयोग और फिर मुख्य आरोपी का खुलेआम घूमना, शासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर करारा तमाचा है। टिकरिया के ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूर्व सरपंच से पूर्ण राशि की रिकवरी नहीं होती और उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक उनका यह आंदोलन और विरोध जारी रहेगा। अब देखना यह है कि इस खोजी रिपोर्ट के बाद नींद में सोया प्रशासन जागता है या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का यह खेल यूं ही परदे के पीछे चलता रहेगा।

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