प्रकृति का 'फ्री' एक्शन: जहां नगर निगम कटनी ने बहाए लाखों, वहां पहली बारिश ने साफ करनी शुरू कर दी कटनी नदी की जलकुम्भी
विशेष रिपोर्ट | कटनी
कटनी नगर निगम के कागजी दावों और फाइलों में तैरती सफाई व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुल गई है। जिस जलकुंभी को हटाने के नाम पर नगर निगम ने जनता के टैक्स के लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए, उसे प्रकृति ने महज़ एक ही बारिश में 'मुफ्त' में बहाकर साफ करना शुरू कर दिया है।
नगर निगम के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत यह है कि नदी अब भी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही थी, लेकिन मानसून की पहली फुहार ने वह कर दिखाया जो लाखों का बजट नहीं कर पाया।
कागजों पर चमकी नदी, जमीन पर जस की तस!
कुछ दिनों पहले तक नगर निगम प्रशासन ढोल पीट रहा था कि कटनी नदी से जलकुंभी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। सुर्खियां बटोरी गईं, फोटो सेशन हुए और बिल पास करा लिए गए। लेकिन शहर की जागरूक जनता सब देख रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। अगर वाकई में लाखों रुपए खर्च करके जलकुंभी हटा दी गई थी, तो मानसून की पहली बारिश होते ही नदी में इतनी भारी मात्रा में जलकुंभी बहती हुई कहां से दिखाई देने लगी?
जब प्रकृति को ही करना था, तो टैक्स का पैसा क्यों डूबा?
जनता का अब सीधा और तीखा सवाल है— जब एक तेज बारिश में ही जलकुंभी को बहकर साफ होना था, तो सफाई के नाम पर लाखों रुपए का बजट क्यों ठिकाने लगाया गया?
"यह जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का सरासर दुरुपयोग है। हर साल जलकुंभी हटाने के नाम पर टेंडर जारी होते हैं, लाखों का वारा-न्यारा होता है, और नतीजा ढाक के तीन पात रहता है। इस बार तो प्रकृति ने खुद ही निगम के भ्रष्टाचार और नाकामी को धोकर सामने रख दिया है।"
— (एक स्थानीय नागरिक)
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
- सवाल 1: जलकुंभी सफाई के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपयों का असली आउटपुट क्या है?
- सवाल 2: क्या अधिकारियों को यह तकनीकी ज्ञान नहीं था कि बारिश के फ्लो में जलकुंभी स्वतः बह जाती है, या फिर जानबूझकर बारिश से ठीक पहले बजट खपाने का खेल खेला गया?
- सवाल 3: कागजी दावों की जमीनी स्तर पर उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं की जाती?
जनता सब जानती है...
नगर निगम भले ही अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन कटनी की जनता अब जागरूक है। पहली ही बारिश ने साफ कर दिया है कि नदी की सफाई का दावा कितना खोखला था। अब देखना यह होगा कि इस 'सफाई खेल' पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी क्या सफाई देते हैं, या फिर हमेशा की तरह इस मुद्दे को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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