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सरपंच का गंभीर आरोप: विकास कार्यों में रोड़ा अटका रहे उपसरपंच, भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे की साये में घिरी ग्राम पंचायत

कलेक्टर कार्यालय में शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, ग्राम विकास ठप

ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द इन दिनों विकास कार्यों के बजाय आपसी खींचतान और भृष्टाचार  के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत की सरपंच छुट्टू कोल ने उपसरपंच भूषण पाठक पर ग्राम विकास में लगातार व्यवधान पैदा करने और अपने रसूख का इस्तेमाल कर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सरपंच का कहना है कि उपसरपंच खुद को घोटालों से बचाने के लिए प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं और उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

लाखों की रिकवरी और अतिरिक्त भुगतान का मामला

​सरपंच छुट्टू कोल द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, उपसरपंच भूषण पाठक का परिवार पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं के घेरे में है। उन्होंने बताया कि:

  • ​आदिवासी सामुदायिक भवन टिकरिया घोटाला: उपसरपंच की धर्मपत्नी और पूर्व सरपंच माधुरी पाठक के ऊपर आदिवासियों के सामुदायिक भवन' निर्माण कार्य में लगभग ₹2.5 लाख की शासकीय रिकवरी का मामला पहले से ही लंबित है।
  • अतिरिक्त राशि आहरण: इसके अलावा, तीन अन्य अतिरिक्त निर्माण कार्यों में भी स्वीकृत राशि से अधिक (अतिरिक्त) पैसा निकालने का एक नया मामला वर्तमान में संज्ञान में चल रहा है, जिसकी जांच जारी है।

शासकीय भूमि पर 5 अवैध दुकानों का निर्माण

​मामला सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी तक ही सीमित नहीं है। सरपंच का आरोप है कि उपसरपंच ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय (सरकारी) भूमि पर अवैध रूप से 5 दुकानों का निर्माण करवा लिया है।

​"अपनी पत्नी पर बकाया ₹2.5 लाख की रिकवरी, अतिरिक्त पैसा निकालने के मामलों और शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों (दुकानों) पर पर्दा डालने के लिए उपसरपंच भूषण पाठक लगातार मेरी झूठी शिकायतें कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य मुझे दबाव में लेना और ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को ठप करना है।"

— छुट्टू कोल, सरपंच (ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द)


कलेक्टर दफ्तर के चक्कर काट कर थका सरपंच, कार्रवाई का इंतजार

​हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की लिखित शिकायत सरपंच द्वारा एक से दो बार कलेक्टर कार्यालय में की जा चुकी है। साक्ष्यों के साथ शिकायत सौंपने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में भी रोष है। प्रशासन की इस सुस्ती के कारण न तो अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला है और न ही सरकारी पैसे की रिकवरी हो पाई है।


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