औद्योगिक मौत का 'गुनाहगार' कौन? सोना पाइप इंडस्ट्री में लापरवाही ने ली 19 साल के मासूम मजदूर की जान

सुरक्षा मानकों को ठेंगे पर रखकर चल रही है फैक्ट्री, केवल मर्ग जांच या हत्या का मामला? उठ रहे गंभीर सवाल

कटनी 

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का पसीना बहना तो आम बात है, लेकिन जब सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण उनका खून बहने लगे, तो इसे 'हादसा' नहीं बल्कि 'संस्थागत हत्या' कहा जाना चाहिए। इमलिया औद्योगिक क्षेत्र स्थित सोना पाइप इंडस्ट्री में बुधवार को हुआ वाकया इसका जीता-जागता और बेहद दर्दनाक सबूत है। महज 19 साल के युवा मजदूर घनश्याम (पिता: फूलचंद, निवासी: ग्राम अमुआरी, उमरिया) को क्या पता था कि जिस फैक्ट्री में वह अपनी आजीविका कमाने आया है, वही उसकी जिंदगी की आखिरी जगह बन जाएगी।

 आखिर कैसे हुआ यह खूनी हादसा?

​बुधवार दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच, घनश्याम हमेशा की तरह फैक्ट्री के भीतर मशीन के हॉपर (कच्चा माल डालने वाला हिस्सा) में रॉ-मटेरियल डाल रहा था। ठीक इसी मशीन के ऊपर बिना किसी सपोर्ट, बिना किसी जाली या सुरक्षा दीवार के, कच्चे माल की भारी-भरकम बोरियों का पहाड़ बनाकर रखा गया था।

  • असंतुलन और धमाका: वाइब्रेशन और असुरक्षित स्टेकिंग (रखने के तरीके) के कारण बोरियों का संतुलन बिगड़ा।
  • दब गई सांसें: क्विंटल वजनी बोरियां सीधे 19 वर्षीय घनश्याम के ऊपर आ गिरीं।
  • दम घुटने से मौत: जब तक साथी मजदूर बोरियां हटा पाते, भारी वजन के नीचे दबने से घनश्याम का दम घुट चुका था।

लेबर कानूनों की धज्जियां: विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

​इस हादसे ने माधवनगर औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में चल रहे लेबर कानूनों और 'फैक्ट्रीज एक्ट 1948' के खुले उल्लंघन को उजागर कर दिया है। औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों और श्रम कानून जानकारों के मुताबिक, इस मामले में प्रबंधन सीधे तौर पर कटघरे में है

"केवल मर्ग जांच क्यों? दर्ज हो गैर-इरादतन हत्या का मामला"

​घटना के बाद माधवनगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। लेकिन स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि फैक्ट्री मालिकों को बचाने के लिए मामले को सामान्य 'दुर्घटना' का रूप देने की कोशिश की जा रही है। यह मामला सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लापरवाही से मौत और कार्यस्थल पर सुरक्षा न देने का है, जिसके लिए प्रबंधन पर सीधे आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए।


प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल

​कटनी का इमलिया और माधवनगर क्षेत्र धीरे-धीरे मजदूरों के लिए 'डेथ ट्रैप' बनता जा रहा है। श्रम विभाग (Labour Department) और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (Directorate of Industrial Health and Safety) के अधिकारी दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते। अगर समय-समय पर इन फैक्ट्रियों का सेफ्टी ऑडिट किया गया होता, तो शायद उमरिया के एक गरीब परिवार का चिराग बुझने से बच जाता।

बड़ा सवाल: क्या घनश्याम को मिलेगा न्याय?

​19 साल का घनश्याम अपने परिवार का सहारा था। अब देखना यह है कि कटनी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस मामले में कितनी कड़ाई दिखाता है। क्या सोना पाइप इंडस्ट्री के रसूखदार प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर एक गरीब मजदूर की मौत हमेशा की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी?


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