Chief editor-neeraj pandey
फाइलों में कैद पंचायती राज, इंजीनियरों के चक्कर काट रहे जनप्रतिनिधि
कटनी जनपद की ‘सुस्त’ कार्यप्रणाली से ग्रामीण विकास पर लगा ब्रेक; नाम न छापने की शर्त पर जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा, कहा- इस पंचवर्षीय का नहीं निकल रहा कोई सार।
कटनी।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सपना था कि देश की तरक्की का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है और इसी सोच के साथ 'पंचायती राज' की स्थापना की गई थी। लेकिन कटनी जनपद पंचायत में यह सपना सरकारी कछुआ चाल और लालफीताशाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। जनपद की सुस्त प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को ऐसी 'बाधा' लगी है कि इस पंचवर्षीय कार्यकाल का कोई ठोस सार निकलता दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थिति यह है कि गांवों के मुखिया (सरपंच) और जनप्रतिनिधि विकास कार्यों की फाइलें लेकर जनपद कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए कि लोकतंत्र के इन चुने हुए प्रतिनिधियों को अपनी पहचान छिपाकर मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें डर है कि खुलकर बोलने पर उनके गांवों के बचे हुए काम भी अटका दिए जाएंगे।
20 दिन से एक महीने तक लटकी रहती है तकनीकी स्वीकृति (TS)
नाम न छापने की शर्त पर कई जनप्रतिनिधियों ने बताया कि गांवों में सीसी रोड, नाली निर्माण, या अन्य सामुदायिक विकास कार्यों के लिए सारे आवश्यक कागजात और प्रस्ताव समय पर जमा कर दिए जाते हैं। इसके बावजूद, सब-इंजीनियर और संबंधित तकनीकी अमला तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) देने में 20 दिन से लेकर एक महीने तक का समय लगा देता है। नियमतः जो काम चंद दिनों में होना चाहिए, उसके लिए जनप्रतिनिधियों को इंजीनियरों के सामने मान-मनौव्वल करनी पड़ती है।
नियमों की धज्जियां: कार्य पूर्ण होने के बाद मूल्यांकन के लिए 'पीछे' भागना मजबूरी
शासकीय नियमों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी निर्माण कार्य पूरा होने के 7 दिवस के भीतर उसका तकनीकी मूल्यांकन हो जाना चाहिए ताकि समय पर भुगतान हो सके और अगले कार्य की राह खुले। लेकिन कटनी जनपद में नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
"कार्य पूरा होने के बाद जब तक इंजीनियरों के पीछे न लगो, उनके चक्कर न काटो, तब तक मूल्यांकन नहीं होता। कई बार तो महीनों बीत जाते हैं।
— एक पीड़ित जनप्रतिनिधि (गोपनीयता की शर्त पर)
बड़ा सवाल: ऐसे में कैसे साकार होगा पंचायती राज का सपना?
कटनी जनपद की इस बदहाल प्रशासनिक व्यवस्था ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- जब एक तकनीकी स्वीकृति और मूल्यांकन के लिए जनप्रतिनिधियों को जनपद के चक्कर लगाने पड़ेंगे, तो वे अपने क्षेत्र के विकास पर ध्यान कब देंगे?
- शासन द्वारा तय की गई '7 दिवसीय समय-सीमा' का मखौल उड़ाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई कब होगी?
- क्या ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से सिर्फ इसलिए वंचित रहना पड़ेगा क्योंकि प्रशासनिक अमला अपनी सुस्ती छोड़ने को तैयार नहीं है?
एक नजर में विडंबना: नियम बनाम हकीकत
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विषय |
शासकीय नियम |
कटनी जनपद की हकीकत |
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तकनीकी स्वीकृति (TS) |
प्रस्ताव के तुरंत बाद (शीघ्रता से) |
20 दिन से 1 महीने का इंतजार |
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कार्य का मूल्यांकन |
कार्य पूर्ण होने के 7 दिनों के भीतर |
महीनों चक्कर काटने और पीछे लगने के बाद |
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जनप्रतिनिधियों की स्थिति |
स्वायत्त और सशक्त |
कार्यालयों और इंजीनियरों के फेरे लगाने को मजबूर |
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