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पीएमजीएसवाई (PMGSY) सड़क और पुल निर्माण में भ्रष्टाचार की बू, नियमों को ताक पर रखकर हो रहा घटिया निर्माण

 

मुख्य बिंदु:

  • ​हरदुआ और खोहरी के बीच बन रहे पुल में भारी अनियमितताओं के आरोप।
  • ​तकनीकी मापदंडों और सुरक्षा मानकों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां।
  • ​स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग।

तस्वीरें बयां कर रही हैं लापरवाही का सच



कटनी के अंतर्गत आने वाले हरदुआ और खोहरी गांव के बीच प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत एक महत्वपूर्ण पुल और सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन विकास के इस काम में भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। मौके से आई तस्वीरें और वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे करोड़ों की इस परियोजना में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।

तकनीकी अनियमितताएं और घटिया सामग्री का खेल

​साइट से मिली तस्वीरों को देखकर साफ पता चलता है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया है:

  • सपोर्ट और फिलिंग में भारी लापरवाही: पुल के एप्रोच रोड और किनारों पर मजबूत कंक्रीट वॉल या प्रॉपर रिटेनिंग स्ट्रक्चर बनाने के बजाय मिट्टी और मलबे का ढेर लगा दिया गया है। बारिश के मौसम में यह मिट्टी धंसने और पुल के पूरी तरह जमींदोज होने का खतरा साफ नजर आ रहा है।
  • घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग: बेस और कंक्रीट स्लैब के आसपास बड़ी मात्रा में अनुपयुक्त बोल्डर, अनुपयोगी पत्थर और घटिया मलबे (Debris) का इस्तेमाल किया गया है।
  • फिनिशिंग और अलाइनमेंट गायब: कंक्रीट स्लैब के जोड़ और ढलाई के स्तर में भारी असंतुलन दिखाई दे रहा है, जो भविष्य में भारी वाहनों के गुजरने पर बड़े हादसे को आमंत्रण दे सकता है।
  • "यह पुल हमारे लिए सुविधा नहीं, बल्कि मौत का कुआं साबित हो सकता है। ठेकेदार और विभाग मिलकर जनता के पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं।" > — स्थानीय ग्रामीण


    अफसरों की मौन सहमति पर खड़े हो रहे सवाल?

    ​पीएमजीएसवाई जैसी केंद्रीय योजना, जिसमें मॉनिटरिंग के बेहद सख्त नियम होते हैं, उसमें इस तरह का घटिया काम होना विभाग के इंजीनियरों और सुपरवाइजरों की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सूत्रों की मानें तो ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए बिना किसी जांच के काम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

    ​हरदुआ और खोहरी के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस घटिया निर्माण को रोककर इसकी उच्च स्तरीय तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे।

    ​अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस भ्रष्टाचार पर क्या एक्शन लेते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के इंतजार में फाइलों को दबाए रखते हैं।


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